इस सीट पर तुरुप का इक्का साबित होंगे मुस्लिम वोटर!
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मुजफ्फरनगर की सांप्रदायिक हिंसा किसी न किसी राजनीतिक दल पर जरूर भारी पड़ेगी। गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट के मुस्लिम मतदाताओं का मौन अच्छा संकेत नहीं है।
नाराजगी इसलिए भी है, क्योंकि किसी भी बड़े दल ने मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव नहीं खेला है। इसी के चलते कोई भी दल यह कहने की स्थिति में नहीं है कि मुस्लिम वोट उनकी झोली में ही जाएगा।
कोई नहीं जानता किस करवट बैठेगा ऊंट
गौतमबुद्ध नगर सीट गुर्जर बाहुल्य कही जाती है। सबसे ज्यादा गुर्जर जाति के मतदाता हैं या ठाकुर जाति के, इस बात पर अलग-अलग तर्क दिए जाते हैं। इनकी संख्या का कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है। हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से अंदाजा लगाता है कि ये वोट हमें मिलेंगे।
लेकिन, मुस्लिम वोटर किसको मिलेंगे, यह कोई भी दल विश्वास से नहीं कह पा रहा है। सिकंदराबाद, खुर्जा, दादरी, जेवर और नोएडा विधान सभाओं में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है।
माना जाता है कि करीब दो-ढाई लाख वोटर हैं। एससी और मुस्लिम वोट बराबर की संख्या में माने जाते हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मुजफ्फरनगर कांड का सबसे ज्यादा प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेगा।
कांटे की टक्कर ने उड़ाई नींद
बसपा ने सतीश अवाना पर दांव खेला है। पार्टी मानती है कि 2009 के लोक सभा और विधान सभा के चुनावों में मायावती के नाम पर मुस्लिमों ने वोट डाले थे। इस बार भी मुजफ्फरनगर कांड में बसपा का रवैया एकदम साफ रहा है।
भाजपा ने भी इस बार डॉ. महेश शर्मा को उतारा है। पार्टी मानकर चल रही है कि मोदी की लहर से पढ़ा-लिखा मुस्लिम तबका प्रभावित हुआ है, उसका लाभ जरूर मिलेगा।
सपा ने नरेंद्र भाटी को मैदान में उतारकर दोहरा लाभ लेने का प्रयास किया है। सिकंदराबाद विधान सभा से वह तीन बार विधायक रह चुके हैं। वहां मुस्लिम वोटर उन्हें ही समर्थन करता रहा है। कांग्रेस ने डॉ. रमेश चंद्र तोमर को प्रत्याशी बनाया है। पार्टी मानती है कि जब मुस्लिम किसी अन्य दल से नाराज होता है, तो उसी को वोट मिलते हैं।