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मजिस्ट्रेट ने अधिकार से बाहर जाकर दी जमानत

Sun, 08 Mar 2015 10:35 AM IST
Updated Sun, 08 Mar 2015 10:35 AM IST
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magistrate granted bail go to Outside jurisdiction

जो मामला हत्या की कोशिश संबंधी धारा में दर्ज होना चाहिए था, पुलिस ने उसे घातक हथियार से चोट पहुंचाने संबंधी धाराओं में दर्ज किया। इसके तहत दोषी पाए जाने पर मौत या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। ऐसे मामलों में आरोपी को मजिस्ट्रेट कोर्ट जमानत नहीं दे सकती। दिल्ली में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अपने अधिकार से बाहर जाकर आरोपी को जमानत दी है। सेशन कोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की है।

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तीस हजारी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अतुल कुमार गर्ग ने कहा कि पीड़ित के बयान व उसकी चोटों, पुलिस द्वारा हल्की धाराओं में मामला दर्ज करने और आरोपी के परिजनों द्वारा पीड़ित व उसके दोस्त को धमकी देने के तथ्यों के मद्देनजर आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए थी। कोर्ट ने आदेश की कॉपी संबंधित मजिस्ट्रेट और एसएचओ को भेजने को कहा है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पुलिस के कामकाज पर उंगली उठाते हुए कहा कि मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर ने एमएलसी के पिछले पन्ने पर सिर पर कई चोटों का जिक्र किया था। जांच अधिकारी ने जो एमएलसी पेश की, उसमें इन चोटों का जिक्र नहीं था। एमएलसी बनाने वाली डॉक्टर और चिकित्सा अधीक्षक ने गवाही में इन चोटों का जिक्र किया है।

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पुलिस ने हत्या के प्रयास के मामले को हल्की धारा में किया दर्ज

magistrate granted bail go to Outside jurisdiction

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा और डिंपल विवेक ने कहा इस तर्क से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आरोपी के चाचा ने आरोपी के गिरफ्तार होने से पहले कॉल किया था क्योंकि एफआईआर काफी पहले दर्ज हो चुकी थी। पुलिस ने आरोपी को एमएलसी में गंभीर चोटों जिक्र आने के बाद ही गिरफ्तार किया।

पुलिस ने 5 नवंबर 2014 को एमएलसी रिपोर्ट ली और आरोपी को 20 नवंबर 2014 को गिरफ्तार किया। जमानत पर छूटने के बाद भी आरोपी ने पीड़ित को केस वापस लेने के लिए धमकी दी।

मामला सराय रोहिल्ला थाने में दर्ज है। मामले के अनुसार, आरोपी दीपक ने नवनीत की पिटाई की। बोतल तोड़कर उसके सिर व कंधे पर मारी। नवनीत के सिर चेहरे, गले और कंधे पर धारदार हथियार से काटने के निशान थे। डॉक्टरों ने पीड़ित की चोटों पर 50 टांके लगाए थे। मजिस्ट्रेट ने 22 नवंबर को आरोपी को जमानत दे दी थी। आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए पीड़ित ने आवेदन दायर किया था लेकिन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

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