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इस तकनीकी खामी ने जाट आरक्षण की मांग को बनाया उग्र

Sun, 21 Feb 2016 01:56 PM IST
Updated Sun, 21 Feb 2016 01:56 PM IST
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loop holes in jat reservation system made by government

इस बार जाटों ने सड़क पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी आंदोलन चला दिया है, जिसमें उनको काफी सफलता मिल रही है।

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रोहतक में शुक्रवार को आंदोलन कर रहे जाट युवकों पर गोली चलाने के बाद सभी राज्यों के जाटों ने कड़ी प्रक्रिया देनी आरंभ कर दी।

हरियाणा से बाहर के राज्यों में जाट सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रिय हो गए। उन्होंने सभी राज्यों में आंदोलन शुरू करने के लिए आग्रह करना आरंभ कर दिया।

इसके अलावा अपने-अपने राज्यों में आंदोलन के संबंध में पल-पल की सूचना देने में जुट गए है। वहीं जाट विरोधी नेताओं की बातों व भाषणों की रिकार्डिंग साझा कर रहे है। इस तरह जाटों ने अपना आंदोलन वर्ष 1990 से भी अधिक मजबूती से चलाना शुरू कर दिया है।

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देकर छीना गया है आरक्षण कोटा

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जाट समुदाय को आरक्षण देने के लिए एक नीति नहीं अपनाए जाने के कारण भी हरियाणा के जाटों में उबाल आया हुआ है। कभी उनको आरक्षण मिल जाता है तो कभी उनसे हक छीन लिया जाता है।

इसके अलावा जाटों को केंद्रीय स्तर से लेकर राज्यों तक एक साथ आरक्षण नहीं दिया गया। इसी तरह जाटों को किसी राज्य में केंद्र के साथ आरक्षण दे रखा है, जबकि किसी राज्य में कोई आरक्षण नहीं मिला है।

हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जहां जाटों को सबसे पहले आरक्षण देने का एलान हुआ था, लेकिन सरकार ने वर्ष 1993 में राज्य ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की।

2014 में केंद्रीय सूची में जाटों को मिला आरक्षण

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इसके बाद वर्ष 1999 में आंदोलन के चलते राजस्थान के जाटों को केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्तर पर आरक्षण दे दिया लेकिन उसके भरतपुर और धौलपुर जिला को आरक्षण नहीं दिया।

इसी बीच दिल्ली सरकार ने राज्य में जाटों को आरक्षण दिया। इस तरह धीर-धीरे राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, गुजरात और हरियाणा के जाटों को राज्य स्तर पर आरक्षण दे दिया गया।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में इन राज्यों के जाटों को केंद्रीय स्तर पर आरक्षण की सूची में शामिल किया। मगर देश के अन्य राज्यों में रह रहे जाटों को न तो राज्य और न ही केंद्रीय स्तर पर आरक्षण दिया गया।

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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की आरक्षण की मांग

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इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान राजस्थान को छोड़कर अन्य राज्यों में जाटों को केंद्रीय स्तर पर आरक्षण देने की वर्ष 2014 में जारी हुई केंद्र सरकार की अधिसूचना रद्द कर दी।

इसके कुछ माह बाद हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट ने हरियाणा में जाटों को आरक्षण देने का फैसला रद्द कर दिया। हरियाणा की भांति उत्तर प्रदेश में जाटों को आरक्षण देने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया लेकिन हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।

इसी तरह दिल्ली में भी जाटों को आरक्षण देने के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।

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