4 साल की बच्ची को साथ लेकर ढूंढता रहा पत्नी
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चार वर्षीय पुत्री के साथ विरेंद्र अपनी ‘लापता’ पत्नी आशा को ढूंढने के लिए हाईकोर्ट में मुकदमा लड़ रहा है, करीब डेढ़ वर्ष बाद पत्नी मिली भी तो उसने साथ रहने से इनकार कर दिया।
दरअसल, आशा किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही थी और उसकाएक और बच्चा हो गया। अब अदालत ने उसके प्रेमी को तलब करते हुए उसे नारी निकेतन भेज दिया।
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आशा के तर्क को सुन कर कहा कि यह काफी गंभीर मामला है। यदि आशा बिना विवाह किए दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है तो उसे विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
चल रहा केस, पत्नी ने किया रहने से इंकार
अदालत ने कहा कि या तो उक्त व्यक्ति के खिलाफ मामला बनता है और यदि वह पहले विवाह की जानकारी दिए बिना उक्त व्यक्ति के साथ रह रही है तो महिला के खिलाफ भी मामला बन सकता है।
खंडपीठ ने उक्त व्यक्ति को तलब करते हुए कहा कि वे उसके तर्क सुनने के बाद अपना फैसला देंगे। विरेन्द्र ने खंडपीठ के समक्ष बंदीप्रत्यक्षकरण याचिका दायर की थी। उसने अदालत को बताया कि उसका आशा से 22 फरवरी 2010 को विवाह हुआ था।
इसके बाद 22 नवंबर 2011 को एक बच्ची ने जन्म लिया। आशा विवाह के बाद भी पढ़ना चाहती थी। उसने उसका पत्राचार में दाखिला करवा दिया और स्टेनोग्राफर के कोर्स के लिए जीजा बाई ट्रेनिंग इंस्टीटयूट में दाखिला करवा दिया।
ये है पूरा मामला
अदालत को बताया गया कि आशा 1 अगस्त 2013 को इंस्टीटयूट गई, लेकिन वापस नहीं आई। आखिर उसने लोधी रोड थाने में उसके लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई।
9 अगस्त को पुलिस ने उसके मिलने की सूचना दी और बताया कि वह अपनी इच्छा से पिता के घर गई थी, लेकिन वह पति के घर नहीं आई। आखिर 22 अगस्त 2013 को वह फिर लापता हो गई। उसने आरोप लगाया कि पुलिस उसकी पत्नी को ढूंढने के लिए कुछ नहीं कर रही है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान पुलिस ने महिला को अदालत के समक्ष पेश कर दिया। महिला ने कहा कि वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रही है और खुश है। अदालत ने उससे कहा कि बिना पहले पति का तलाक दिए वह दूसरे के साथ कैसे रह सकती है। अब अदालत मामले में बुधवार को सुनवाई करेगी।