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तनाव से जिंदगी बोझ न बन जाए संभलो यारों

Thu, 12 Mar 2015 01:12 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Thu, 12 Mar 2015 01:12 AM IST
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Look out guys life should not become a burden to stress.
तनाव और थकान के कारण महानगरों में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार ऐसे में लगातार काम करने से लोगों को सीएफएस (क्रोनिक फटीम सिंड्रोम) बीमारी चपेट में ले रही है।
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एनसीआर-दिल्ली सहित महानगरों में इससे पीड़ित लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी की चपेट में आने से लोगों को एमई (मियालाजिक एंसेफेलोपैथी) हो जाता है, इसमें शरीर की ग्रंथियों का जरूरी रिसाव प्रभावित होता है।
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इससे शरीर का साइटोकाईनेज बढ़ जाता है, जिससे इम्यून मालीक्यूल्स बढ़ने लगते हैं। उपचार आसान नहीं। ऐसे मे 50 साल से ज्यादा के लोगों को ताउम्र बीमार रहना पड़ सकता है।
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बीमारी का कारण
थकान और तनाव के बावजूद लगातार काम से लोग इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। बदलती जीवन शैली और खानपान से लोगों की उपापचयी क्रिया (हारमोनल सिस्टम) डिस्टर्ब हो जाता है।


इसके साथ ही तनाव और थकान में काम करते रहने से कई ग्रंथियां (ग्लैंड्स) परमानेंट इफेक्टिड हो जाती हैं।

यह पड़ता है प्रभाव
इसकी चपेट में आने पर शुरूआत में ज्यादा असर नजर नहीं आता। केवल थकान होने, स्मरण शक्ति कमजोर होने और बेचैनी जैसे लक्षण सामने आते हैं।

इससे लोगों की बीमारियों से लड़ने की ताकत (इम्यूनल सिस्टम) कमजोर हो जाती है। इससे पीड़ित लोगों को 50 की उम्र पार करते ही गंभीर बीमारी घेर लेती है।

यही होती है परेशानी
इससे पीड़ित होने पर लगातार रहने वाला मांसपेशियों का दर्द, बार-बार होने वाला वायरल इंफेक्शन, लीवर-किडनी प्रभावित होने, हाईबीपी और हैबिट डिस्आर्डर की समस्या बढ़ जाती है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पीड़ित होने वालों को किसी दवा से ज्यादा लाभ नहीं होता है। यानि ऐसे रोगियों को उम्र भर बीमार ही रहना पड़ता है।

दिल्ली-एनसीआर सहित महानगरों केलोगों के इससे प्रभावित होने की ज्यादा आशंका रहती है।
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