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गठबंधन न होने से दिल्ली में त्रिकोणीय मुकाबला तय, भाजपा को हो सकता है फायदा
Sat, 13 Apr 2019 09:50 AM IST
शाहरुख खान
विजय सिंघल, अमर उजाला, दिल्ली
विजय सिंघल, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 13 Apr 2019 09:50 AM IST
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फाइल फोटो
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दिल्ली में कांग्रेस-आप के गठबंधन न होने से सियासत गर्मा गई है। गठबंधन नहीं होने से अब दिल्ली में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है। गठबंधन न होने की स्थिति भाजपा के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।
राजनीतिज्ञों और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार अब भाजपा एक बार फिर अपनी पुरानी स्थिति में आ गई है। अहम है कि 2014 के चुनाव में भाजपा ने भारी मतों से सातों सीटों पर कब्जा किया था।
भाजपा ने भले ही सातों सीट जीत ली लेकिन यदि कांग्रेस-आप के साझा वोटों पर नजर डाले तो भाजपा सात में से छह सीटों पर पिछड़ रही थी। यानी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिल कर लड़ते तो छह पर भाजपा हार जाती।
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एक मात्र पश्चिमी दिल्ली ही एक सीट रही थी जिस पर कांग्रेस-आप को हासिल वोट को मिलाने के बाद भी भाजपा को मिले वोटों की संख्या ज्यादा थी। यही कारण है कि कांग्रेस-आप के गठबंधन का अहम माना जा रहा था और यह तय माना जा रहा था कि यदि गठबंधन हुआ तो भाजपा के लिए कड़ी चुनौती होगी और भाजपा एक-दो से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी।
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राजनीतिज्ञों और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार अब भाजपा एक बार फिर अपनी पुरानी स्थिति में आ गई है। अहम है कि 2014 के चुनाव में भाजपा ने भारी मतों से सातों सीटों पर कब्जा किया था।
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भाजपा ने भले ही सातों सीट जीत ली लेकिन यदि कांग्रेस-आप के साझा वोटों पर नजर डाले तो भाजपा सात में से छह सीटों पर पिछड़ रही थी। यानी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिल कर लड़ते तो छह पर भाजपा हार जाती।
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एक मात्र पश्चिमी दिल्ली ही एक सीट रही थी जिस पर कांग्रेस-आप को हासिल वोट को मिलाने के बाद भी भाजपा को मिले वोटों की संख्या ज्यादा थी। यही कारण है कि कांग्रेस-आप के गठबंधन का अहम माना जा रहा था और यह तय माना जा रहा था कि यदि गठबंधन हुआ तो भाजपा के लिए कड़ी चुनौती होगी और भाजपा एक-दो से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी।
दिल्ली में कांग्रेस ने पिछले पांच वर्षों में अपनी स्थिति में काफी सुधार किया है और वह अब संघर्ष व चुनौती देने की स्थिति में है। आप ने पिछले चुनावों में जो भी वोट हासिल किए उसमें से 99 प्रतिशत कांग्रेस के ही वोट बैंक में सेंध लगाई थी और अब इनमें से अधिकांश वोट वापस लेने में कांग्रेस कामयाब हुई है।
गठबंधन न होने की स्थिति में भाजपा फायदे में मानी जा रही है। राजनीतिज्ञों के अनुसार अब भाजपा एक बार फिर अपनी पुरानी स्थिति में आ गई है। यह अलग बात है कि भाजपा के सांसदों से मतदाता खुश नहीं है लेकिन बावजूद भाजपा का अपना कैडर वोट है ऐसे में इन वोटों में सेंध लगाना कांग्रेस-आप के लिए कठिन साबित होगा।
गठबंधन न होने की स्थिति में भाजपा फायदे में मानी जा रही है। राजनीतिज्ञों के अनुसार अब भाजपा एक बार फिर अपनी पुरानी स्थिति में आ गई है। यह अलग बात है कि भाजपा के सांसदों से मतदाता खुश नहीं है लेकिन बावजूद भाजपा का अपना कैडर वोट है ऐसे में इन वोटों में सेंध लगाना कांग्रेस-आप के लिए कठिन साबित होगा।