शीला सरकार में मंत्री रह चुके राजकुमार चौहान हुए भाजपा में शामिल
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चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद भाजपा ने दिल्ली कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के करीबी माने जाने वाले दिल्ली के पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान ने भाजपा का दामन थाम लिया है। शनिवार को उन्होंने दिल्ली भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। भाजपा में शामिल होते ही चार बार के विधायक राजकुमार चौहान ने पूर्व सीएम शीला दीक्षित पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शीला दिमागी रुप से बीमार हैं। 84 साल की बुजुर्ग शीला दीक्षित को बार-बार भूलने की बीमारी है।
राजकुमार चौहान ने बताया कि अभी भी शीला दीक्षित चुनाव प्रचार के दौरान माइक पर बोलने से पहले पूछती हैं कि वोट किस तारीख में करने को बोलूं। उनको ये नहीं पता कि 12 मई को चुनाव है। उनको नहीं पता कि क्या कहना चाहिए, क्या करना चाहिए। चौहान का कहना है कि दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद एक कार्यक्रम में वे भी मौजूद थे, वहां शीला दीक्षित ने भाजपा का नारा स्वच्छ भारत तक कह डाला।
राजकुमार चौहान ने कहा कि दिल्ली के हर विभाग में लगभग वे काम कर चुके हैं। राजीव रत्न आवास योजना बनाई थी, जिसमें 25 हजार फ्लैट बनाए गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए शीला दीक्षित ने एक भी फ्लैट किसी को आवंटित नहीं होने दिया। चौहान ने कहा कि वे लंबे समय से पीएम मोदी की नीतियों को देखते आ रहे हैं। इसलिए अब वे भाजपा में आए हैं।
वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि वे ऐसे समय के गवाह बन रहे हैं जब कांग्रेस के ही नेता पार्टी को एक्सपोज कर रहे हैं। इसी बीच उन्होंने सैम पित्रोदा के बयान को लेकर कहा कि 1984 में कत्लेआम हुआ और कांग्रेस उस पर नमक छिड़कने का काम कर रही है।
उत्तर पश्चिमी सीट से थे टिकट के दावेदार
अहम है कि राजकुमार चौहान उत्तर-पश्चिमी सीट से कांग्रेस से टिकट के दावेदार थे। कांग्रेस ने उनकी दावेदारी खत्म कर राजेश लिलोठिया को प्रत्याशी बनाया था। लिलोठिया शीला के करीबी माने जाते हैं। टिकट न मिलने के कारण राजकुमार चौहान की कांग्रेस पार्टी में नाराजगी को लेकर खबरें सामने आ रही थीं। उनके समर्थकों ने भी टिकट न मिलने के कारण कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया था।
टिकट नहीं मिलने पर सांसद उदित राज कांग्रेस में हुए थे शामिल
उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट के वर्तमान सांसद डॉ. उदित राज भी कुछ दिन पहले सुर्खियों में आए थे। भाजपा ने उन्हें जब दोबारा टिकट नहीं दिया तो वे नाराज हो गए। उनके समर्थकों ने भी काफी हंगामा किया था और नामांकन खत्म होने के अगले ही दिन डॉ. उदित राज ने कांग्रेस में जा शामिल हुए।