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इनेलो की धुंधलाती सियासी 'नजर': कभी पार्टी का चलता था सिक्का, आज 100 से अधिक बूथों पर नहीं मिला एक भी वोट

Fri, 07 Jun 2024 05:30 AM IST
आकाश दुबे अनूप पाराशर, अमर उजाला, पलवल
अनूप पाराशर, अमर उजाला, पलवल Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 07 Jun 2024 05:30 AM IST
सार

पलवल और होडल विधानसभा के अंदर किसी भी बूथ पर इनेलो 100 का आंकड़ा तक नहीं छू पाई। हथीन में भी मात्र दो बूथ पर ही 100 का आंकड़ा पार कर पाई।

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Lok Sabha Election 2024 INLD did not get a single vote in more than 100 booths
अभय चौटाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्रामीण बाहुल्य पलवल जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर लंबे समय तक परचम लहराने वाली इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की हालत 2024 लोकसभा चुनाव में जिले की तीनों विधानसभाओं में स्थिति इस बार बेहद नाजुक रही। पलवल और होडल विधानसभा के अंदर किसी भी बूथ पर इनेलो 100 का आंकड़ा तक नहीं छू पाई। हथीन में भी मात्र दो बूथ पर ही 100 का आंकड़ा पार कर पाई। जिले की तीनों सीटों पर 100 से अधिक बूथ तो ऐसे हैं, जिन पर इनेलो प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं मिला। वहीं कई बूथों पर इनेलो प्रत्याशी से ज्यादा नोटा को वोट पडे़।

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वर्ष 2000, 2005, 2009 के विधानसभा चुनावों में तथा लोकसभा चुनाव में इनेलो का सिक्का चलता था। वर्ष 2000 में जहां इनेलो ने होडल व हथीन विधानसभा चुनाव जीता, वहीं पलवल में 35 हजार वोट लेकर इनेलो प्रत्याशी देवेंद्र चौहान दूसरे स्थान पर रहे। 2005 में तीनों सीटों पर जीत तो कांग्रेस की हुई, लेकिन दूसरे नंबर पर इनेलो प्रत्याशी रहे। वहीं लोकसभा चुनाव में भी 2000 में इनेलो व भाजपा समर्थित रामचंद बैंदा ने चुनाव जीता। उसके बाद 2009 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के सुभाष चौधरी ने पलवल में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता करण दलाल को चुनाव हराकर इनेलो को मजबूती दी। 

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वहीं लोकसभा चुनाव में इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़े आरके आनंद फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहे, जबकि पलवल और हथीन विधानसभा सीटों पर दूसरे नंबर पर रहे। 2014 के चुनाव में इनेलो के केहर सिंह रावत ने हथीन विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, जबकि पलवल और होडल में 20 हजार के करीब वोट हासिल किए। पलवल जिले में हर बार लोकसभा व विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली इनेलो इस बार 2024 लोकसभा चुनावों में पलवल जिले की तीनों सीटों पर बुरी स्थिति में आ गई। पलवल और होडल में जहां सभी बूथों पर 100 वोटों से भी कम वोट हासिल किए, वहीं हथीन में 199 बूथों में से मात्र दो बूथों पर 200 का आंकड़ा छू पाई।

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इन बूथों पर नहीं मिला एक भी वोट
कारना गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के राइट साइड बूथ पर इनेलो प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं मिला। जबकि 2000, 2005, 2009 में धतीर में इनेलो ने कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों को दो गुणा वोट के अंतराल से मात दी थी। सेंट सीआर स्कूल सल्लागढ़, एसडी कॉलेज पलवल, मंडी धर्मशाला, हूडा सेक्टर दो स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला, डीजी खान स्कूल, सरस्वती स्कूल पलवल, पीडबल्यूडी, पब्लिक हेल्थ, राजकीय कन्या स्कूल कैंप, जोन बैपटिस्ट स्कूल, राजकीय प्राथमिक पाठशाला दो, गांव चिरवाडी, पेलक, बागपुर, शेपुर खादर, ताराका, असावटा, बडौली, चांट, सुलतापुर, लालगढ़, बाता, अमरौली रायदासका, बेला, बिललोचपुर, पीरगढ़ी, काशीपुर, शोरूका नंगला शामिल हैं, जहां एक भी वोट नहीं मिला। इसी तरह से हथीन और होडल में भी 50-50 से अधिक बूथ हैं, जहां एक भी वोट नहीं मिला।

इनेलो के इस स्थिति में पहुंचने का कारण खुद इनेलो है। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के जेल जाने के बाद कमान अभय चौटाला के हाथों में आ गई। जिसके बाद कार्यकर्ताओं को पार्टी में सम्मान मिलना बंद हो गया। उसके बाद 2014 के चुनाव के बाद परिवार में आपसी कलह के कारण बिखराव हो गया। उसके बाद इनेलो का कार्यकर्ता निराश हो गया और कोई भाजपा में तो कोई कांग्रेस में चला गया। आज हालात ये हैं कि बूथों पर इनेलो का बस्ता उठाने वाला कोई नहीं है। यही स्थिति अब जजपा की हो गई है। परिवार की आपसी फूट व कार्यकर्ताओं को लगातार अपमानित करना इनेलो की इस स्थिति का जिम्मेदार है। -केहर सिंह रावत, पूर्व इनेलो विधायक व हाल भाजपा नेता

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