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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Locks, broken seats, and filth... public toilets in Nuh in a state of neglect.

Delhi NCR News: ताले, टूटी सीटें और गंदगी... नूंह में सार्वजनिक शौचालय बदहाली के शिकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:27 AM IST
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- 72 लाख की योजना अधूरी, पुराने शौचालय जर्जर... ताले, गंदगी और टूटी सीटों के बीच महिलाएं सबसे ज्यादा बेबस
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रिजवान खान
नूंह।
शहर को स्वच्छ और सुविधायुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच नूंह के सार्वजनिक शौचालय सरकारी लापरवाही की दर्दनाक तस्वीर पेश कर रहे हैं। करोड़ों रुपये स्वच्छता अभियानों पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन शहर के लोग आज भी शौच और पेशाब जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भटक रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बाहर से आने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है। सवाल यह है कि जब शहर के सार्वजनिक शौचालय ही बदहाल हैं तो आखिर स्वच्छता अभियान के दावे किसके लिए किए जा रहे हैं?

शुक्रवार को की गई पड़ताल में सरकारी दावों की हकीकत सामने आई। दोपहर 12:30 बजे टीम अड़बर चौक स्थित सार्वजनिक शौचालय पहुंची तो मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि शौचालय अक्सर बंद रहता है। मजबूरी में राहगीर और दुकानदार खुले में पेशाब करते हैं, जिससे गंदगी भी फैलती है और शहर की छवि भी खराब होती है।
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इसके बाद करीब 1:15 बजे गौशाला रोड स्थित सार्वजनिक शौचालय का निरीक्षण किया गया। यहां हालात और भी भयावह मिले। अंदर टूटी हुई सीटें, चारों तरफ फैली गंदगी, पानी की कोई व्यवस्था नहीं, बदबू से दम घुटने जैसी स्थिति और जर्जर होती दीवारें साफ बता रही थीं कि वर्षों से रखरखाव नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। पुरुष किसी तरह खुले स्थानों का सहारा ले लेते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए यह समस्या सम्मान और स्वास्थ्य दोनों से जुड़ी हुई है। बाजार आने वाली महिलाओं को घंटों तक शौच रोककर रखना पड़ता है या फिर बिना काम निपटाए घर लौटना पड़ता है। कई बार बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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सरकार ने वर्ष 2025 में 72 लाख रुपये की लागत से शहर में छह नए सार्वजनिक शौचालय बनाने की मंजूरी दी थी। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार मार्च 2026 तक सभी शौचालय बनकर चालू हो जाने थे, लेकिन आज तक केवल दो ही बन पाए हैं। शेष चार शौचालय अधूरे पड़े हैं। बताया जा रहा है कि निर्माण एजेंसी बीच में ही काम छोड़कर चली गई, लेकिन सवाल यह है कि एजेंसी के भाग जाने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?

- दुकानदारों को होती है सबसे ज्यादा परेशानी
शहर में सार्वजनिक शौचालय जर्जर होने के कारण आम लोगों के साथ-साथ दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मजबूरी में दुकानदारों को इधर उधर खुले में शौच करना पड़ता है, जिससे गंदगी के अलावा फैलने वाली बदबू से लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। दुकानदार अकबर का कहना है कि कई बार अधिकारियों को इसके बारे में अवगत कराया लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। नगर परिषद के एसडीओ जयपाल का कहना है कि दो शौचालय तैयार हो चुके हैं तथा बाकी चार के निर्माण के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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कई बार बाजार से खरीदारी के लिए महिलाएं साथ आ जाती हैं ऐसे में उन्हें शौच की हाजत हो जाए तो बड़ी परेशानी होती है। शौचालय लम्बे समय से खराब पड़े हैं।
- प्रीतम मास्टर, रेवासन।

गौशाला रोड का शौचालय वर्षों से बदहाल है। शिकायतें हुईं, लेकिन अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया। अभी प्रशासन समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं कर पाया है।

- अकबर प्रधान।
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बाहर से आने वाले लोग शहर की पहली तस्वीर इन्हीं शौचालयों से देखते हैं। इससे नूंह की छवि खराब होती है। हमारी मांग है कि जल्द शौचालयों की मरम्मत कराकर इन्हें शुरू कराया जाए।
- नेहा सिंह दुर्गा, सामाजिक कार्यकर्ता।
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72 लाख की योजना अधूरी छोड़ दी गई। जनता को सुविधा नहीं मिली और जिम्मेदार जवाबदेही से बचते रहे। जल्दी ही सभी शौचालयों को बनाकर तैयार किया जाए।
- हाजी असगर टाईं, समाजसेवी।
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