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वार्डबंदी तोड़ेगी मौजूदा पार्षदों का राजनीतिक ‘किला’

Wed, 01 Apr 2015 05:41 PM IST
Updated Wed, 01 Apr 2015 05:41 PM IST
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Local body elections in Faridabad

फरीदाबाद के स्थानीय निकाय चुनाव को देखते हुए राज्य सरकार ने वार्डबंदी के लिए सर्वे तो पूरा कर लिया है। लेकिन वार्डों की जो बाउंड्री तय की गई है, उसे मानने के लिए ज्यादातर मौजूदा पार्षद राजी नहीं हैं। वार्डों का जो नया खाका तैयार हुआ है उसमें राजनीतिक मैदान मारने के लिए कोशिश ज्यादा करनी होगी। वार्डबंदी के बाद नगर निगम अधिकारियों ने सभी 35 वार्डों की बाउंड्री बदल डाली है।

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मौजूदा पार्षदों को लगता है कि उन्होंने पांच साल तक जिस क्षेत्र में विकास कार्य करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया वह तो किसी और वार्ड में चला गया। जो नया क्षेत्र आया है, उसमें या तो जनाधार नहीं है या फिर जातीय समीकरण नहीं फिट हो रहे हैं। ऐसे में पार्षद विधायकों पर आरोप लगा रहे हैं कि वह नए लोगों को चुनाव जितवाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि पुराने पार्षद फिर जीते तो वे विधानसभा चुनाव में उनके लिए खतरा बन सकते हैं।
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ऐसे में पार्षदों ने अपने राजनीतिक किले बचाने के लिए वार्डबंदी में तय की गई वार्डों की बाउंड्री का विरोध करने का निर्णय लिया है। बाउंड्री अपने हिसाब से तय करवाने को लेकर पार्षदों में आपसी खींचतान भी चल रही है। क्योंकि ज्यादा फेरबदल पर सुरक्षित सीट नहीं रह जाएगी। पूरे शहर में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि कौन-कौन सा क्षेत्र किस वार्ड में आ गया है। इसीलिए हमने कोशिश कर नगर निगम अधिकारियों की ओर से फाइनल किया गया वार्डबंदी का मैप प्राप्त किया।
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ऐसे तय की गई बाउंड्री

Local body elections in Faridabad

-बाउंड्री तय करने में अहम भूमिका अदा करने वाले नगर निगम के पूर्व सीनियर टाउन प्लॉनर रवि सिंगला का कहना है कि उन्होंने जनसंख्या के हिसाब से वार्डों का गठन किया। इसका आधार 2011 की जनगणना के मुताबिक निगम क्षेत्र की जनसंख्या (लगभग 14 लाख) को बनाया गया है। इसके आधार पर हर वार्ड की जनसंख्या 40-40 हजार करके बाउंड्री तय की गई है।

चुनावी तस्वीर साफ होने में लगेगा वक्त
-शहर के लोगों को अभी वार्डों का आरक्षण घोषित होने का इंतजार है, ताकि पता चल सके कि उनका वार्ड जनरल, एससी, बीसी, महिला में से क्या है। बाउंड्री और आरक्षण तय होने के बाद जिले में बनी वार्डबंदी कमेटी उसे पास कर सरकार के पास भेजेगी। राज्य सरकार इस पर आम जनता से आपत्तियां आमंत्रित करेगी। लोगों की आपत्तियों पर सुनवाई होगी। तब जाकर नगर निगम चुनाव की तस्वीर साफ हो पाएगी।

-वर्ष 2001 में भी निगम की वार्डबंदी की गई थी। इससे पहले वार्डों की संख्या 25 थी। इसे बढ़ाकर 35 कर दिया गया। 14 साल बाद इस बार हुई वार्डबंदी में सरकार के नोटिफि केशन निकालकर वार्डों की संख्या को यथावत रखने के निर्देश दिए थे।

यह पता लगा है कि कुछ वार्ड दो विधानसभा में कर दिए गए हैं, जो गलत है। क्या पार्षद काम करवाने के लिए दो-दो विधायकों से बात करेगा।
-सूबेदार सुमन, शहर के पहले

नोट- इस खबर से संबंधित खास नक्‍शे को देखने के लिए आप 1 अप्रैल को प्रकाशित अखबार अमर उजाला के फरीदाबाद संस्करण के पृष्ठ संख्या दो पर देख सकते हैं।

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