एनएमसी बिल के विरोध में दिल्ली समेत देशभर के डॉक्टर हड़ताल पर, कहा- राष्ट्रविरोधी बिल वापस लो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस कारण 30 से 40 हजार मरीजों को उपचार के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि पहले तो इस हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात थी, लेकिन गुरुवार को तीनों ही अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को भी हड़ताल में शामिल कर लिया गया। दोपहर दो बजे संसद का घेराव के लिए एम्स से कूच किया गया। एम्स में हड़ताल पर बैठे रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि एनएमसी बिल राष्ट्रविरोधी, स्वास्थ्य विरोधी और गरीब विरोधी है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी।
हड़ताल पर बैठे रेजिडेंट डॉक्टरों ने कहा कि हमारी हड़ताल एनएमसी बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर है। रेजिडेंट डॉक्टर काम नहीं कर रहे हैं। फैकल्टी और सलाहकार सेवाएं दे रहे हैं। अगर सरकार हमारी बात नहीं सुनती है तो यह चिकित्सा क्षेत्र का काला दिवस होगा।
दिल्ली के अलावा केरल में भी इस बिल का विरोध किया जा रहा है। गुरुवार को केरल में मेडिकल छात्रों ने राज भवन के सामने बैनर पोस्टर के साथ नेशल मेडिकल कमिशन बिल का विरोध किया।Resident Doctor: Our strike is against some provisions of NMC Bill. Resident doctors have been withdrawn from services. Faculty&consultants are providing services. If govt doesn't listen to us then it would be counted as one of the blackest days in history of medical fraternity. pic.twitter.com/pmyY54CP5Q
— ANI (@ANI) August 1, 2019
Kerala: Medical students protest against National Medical Commission Bill, 2019 in front of Raj Bhavan in Trivandrum. pic.twitter.com/nPCPjWhFCe
— ANI (@ANI) August 1, 2019
करीब दस हजार से ज्यादा डॉक्टरों के मौजूद रहने की संभावना है, पुलिस को लिखे पत्र में जानकारी दी है। बुधवार को दिल्ली एम्स की रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने प्रबंधन को हड़ताल की सूचना दी तो चिकित्सा अधीक्षक ने तत्काल आपात बैठक बुलाई। बैठक में एम्स प्रबंधन ने 10 लेयर इंतजाम किए हैं।
क्या कहता है एम्स
एम्स के अनुसार, आज(1 अगस्त) को नए मरीजों को उपचार नहीं मिल सकेगा। ओपीडी में पहले से ही अपाइंटमेंट ले चुके रोगियों के अलावा फॉलोअप केस ही देखे जाएंगे। एम्स आरडीए के अध्यक्ष डॉ. अमरिंदर ने कहा कि बार-बार मांग करने के बाद भी केंद्र सरकार डॉक्टरों के खिलाफ तानाशाही दिखाने में लगी है। विधेयक में कई ऐसे प्रस्ताव हैं, जो चिकित्सक वर्ग के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
अगर राज्यसभा में विधेयक पेश होने से पहले सरकार ने उनकी मांगों को नहीं सुना तो इसके काफी नुकसानदायक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमेध ने कहा कि विधेयक में नीट पीजी और एक्जिट एग्जाम के अलावा निजी मेडिकल कॉलेजों में महज 50 फीसदी सीटों पर फीस नियंत्रण जैसे कानून गलत हैं।
क्रॉसपैथी को लाना सिरे से खारिज करने वाला है। विधेयक के तहत चार बोर्ड बनाए जाएंगे, जिनमें चिकित्सीय क्षेत्र के लोगों की सहभागिता न के बराबर है। बाहरी क्षेत्र के अधिकारियों को चिकित्सीय वर्ग को समझने में काफी कठिनाइयां आएंगी। इनके अलावा, यूआरडीए चिकित्सीय संगठन ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है।
उधर, आईएमए के अनुसार, बुधवार को देशभर में फैली उनकी शाखाओं में डॉक्टरों ने हड़ताल की और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। करीब साढ़े तीन लाख डॉक्टरों ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की। इनका कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल भी हो सकती है।