गवाह मुकरने से समाप्त नहीं होते साक्ष्य मूल्य, कोर्ट ने मां को सुनाई उम्रकैद की सजा
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दस में से छह गवाहों के मुकरने के बावजूद मां फरजाना को उसकी तीन माह की बच्ची की हत्या में दोषी ठहराते हुए अदालत ने सुस्थापित विधिक सिद्धांत (निश्चित कानूनी राय) की जानकारी दी। अदालत ने बच्ची की मौत मां के बेडरूम में होना और उस दौरान वहां केवल मां के ही मौजूद रहने और मौत के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं देने को महत्वपूर्ण मानते हुए सजा सुनाई है।
अदालत ने फैसले में कहा है कि गवाहों के मुकरने से सबूतों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, बल्कि उनके साक्ष्यों को भी सावधानीपूर्वक विचार में लिया जा सकता है। अभियुक्त के खिलाफ आरोपों को प्रमाणित करने के लिए गवाहों के मुकरने के बयानों से भी सहायता ली जा सकती है।
प्रकरण में यह स्पष्ट है कि घटनास्थल जहां बच्ची की मृत्यु हुई है, वह अभियुक्त का बेडरूम है। कई गवाहों ने इस संबंध में बयान दिए हैं। वहीं, फरजाना ने बयान में कहा है कि बच्ची के गले में दुपट्टा फंस गया था। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले पर चोट का कोई निशान नहीं पाया गया।
बच्ची के चेहरे पर चार खरोंच के निशान मिले हैं। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि हाथ जैसी कोई चीज से बच्ची का मुंह और नाक बंदकर श्वास नली दबा दिया गया जिससे उसकी मौत हो गई और बच्ची के छटपटाने पर उसके चेहरे पर खरोंचें आ गईं।