3 माह की बेटी की हत्या में मां को उम्रकैद, पति ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दादरी की नई आबादी में तीन माह की बच्ची की हत्या में एडीजे-चतुर्थ शिवानी जायसवाल ने उसकी मां को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। बच्ची के पिता ने पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। मामले में सुनवाई के दौरान गवाह बयान से मुकर गए थे। इसके बावजूद अदालत ने बच्ची की मां को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई है। इस लिहाज से ये फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है।
सरकारी वकील मनोज तेवतिया और गिरीश चांदना ने बताया कि 5 अक्तूबर 2015 को नई आबादी निवासी इरशाद ने दादरी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दोपहर एक बजे वह अपने माता-पिता के पास नीचे बैठा था। पत्नी फरजाना छत पर बने बेडरूम में तीन माह की बेटी कासिफा को छोड़कर आई और आधा घंटा उनके पास बैठने के बाद बेडरूम में जाकर बोली कि कासिफा की मौत हो गई है।
इरशाद यह बात सुनकर चौंक गया। इरशाद की तहरीर पर पुलिस ने फरजाना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची की मौत दम घुटने से होने की जानकारी मिली। पुलिस ने फरजाना के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की और दस गवाहों के बयान दर्ज कराए जिसमें से छह गवाह बयान से मुकर गए।
न हादसा, न स्वाभाविक मौत, बल्कि मानव वध था: अदालत
इसके बावजूद अदालत ने फरजाना को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और एक हजार रुपये का अर्थदंड जमा करने का भी आदेश दिया है। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक के बयान महत्वपूर्ण माने गए।
फैसले में कोर्ट ने कहा है कि विवेचना के परिपेक्ष्य में परिस्थितियों की कड़ी से एक मजबूत शृंखला बन रही है जो ये प्रमाणित कर रही है कि कासिफा की मृत्यु न तो दुर्घटना में हुई है और न ही मृत्यु स्वाभाविक थी, बल्कि मानव वध था। बच्ची की हत्या फरजाना ने श्वास नली अवरोधित करके की है।