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Delhi Blast: "ओवरग्राउंड वर्कर्स" पर कार्रवाई हो...इस व्यवस्था को बेअसर करने की जरूरत; बोले- लेफ्टिनेंट जनरल

Wed, 12 Nov 2025 10:39 AM IST
शाहरुख खान एएनआई, दिल्ली
एएनआई, दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 12 Nov 2025 10:39 AM IST
सार

दिल्ली ब्लास्ट पर पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने गहरा दुख व्यक्त किया और इसे "अतीत की भयानक यादों को ताज़ा करने वाला" बताया। 
 

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Lieutenant General Syed Ata Hasnain Retd in an exclusive interview on Delhi blast
Lieutenant General Syed Ata Hasnain (Retd.) - फोटो : ANI

विस्तार

देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए कार ब्लास्ट की वारदात ने सुरक्षा विशेषज्ञों और आम लोगों को चिंतित कर दिया है। दिल्ली विस्फोट पर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने एएनआई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा "मैं अपने लोगों की जान जाने पर गहरा दुःख व्यक्त करता हूं। मैं इसे एक घटना कहूंगा, क्योंकि अभी तक कोई सबूत नहीं है, जांच चल रही है और हमें अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए ताकि हम किसी भी तरह से इस पूरी जांच को प्रभावित न करें...
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यह अतीत के उन भयावह लम्हों की याद दिलाता है जब हम दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और ऐसी ही जगहों पर ऐसी घटनाएं होते देखते थे। मुझे आज भी 1993 के मुंबई विस्फोट याद हैं। मुझे सरोजिनी नगर, अक्षरधाम, 13/11 दिल्ली उच्च न्यायालय की घटना याद है... 
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अतीत की कड़वी यादें ताज़ा
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "ऐसा लगता है कि यह अतीत के भयानक समय की ओर एक वापसी है जब हम दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और इसी तरह की जगहों पर ऐसी घटनाएं होते देखते थे।" उन्होंने विशेष रूप से 1993 के मुंबई विस्फोटों, सरोजिनी नगर, अक्षरधाम और दिल्ली उच्च न्यायालय में 13/11 की घटनाओं का उल्लेख किया, जो भारत के इतिहास में काले अध्यायों के रूप में दर्ज हैं। इन घटनाओं का जिक्र वर्तमान परिदृश्य को और अधिक गंभीर बनाता है।
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आतंकवाद का बदलता स्वरूप और ओवरग्राउंड वर्कर्स का जाल
लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने वैश्विक आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध समाप्त हो गया है, वैश्विक आतंक का पदचिह्न भी काफी कम हो गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर से नहीं।" उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की संख्या कम हुई है, लेकिन "ओवरग्राउंड वर्कर्स का एक पारिस्थितिकी तंत्र" अभी भी सक्रिय है। उन्होंने चिंता जताई कि इस मामले में भी डॉक्टर और बुद्धिजीवी जैसे लोग जांच के दायरे में आए हैं।

उन्होंने "ओवरग्राउंड वर्कर्स" की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि ये आतंकवादी की तरह छिपे नहीं रहते, बल्कि सामान्य जीवन जीते हुए आतंकवादी नेटवर्क के लिए काम करते हैं। उन्होंने 2017-18 तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा इस पारिस्थितिकी तंत्र को काफी हद तक कमजोर करने की सराहना की, लेकिन इसके पूर्ण उन्मूलन की आवश्यकता पर बल दिया।

'विकसित भारत' के लक्ष्य के बीच बाधाएं
लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने भारत की 'विकसित भारत' बनने की महत्वाकांक्षा के संदर्भ में इस प्रकार की घटनाओं के संभावित उद्देश्यों पर भी विचार किया। उन्होंने कहा, "कई लोग असहज हो सकते हैं क्योंकि भारत 'विकसित भारत' बनने का लक्ष्य रख रहा है... बहुत सारे विरोधी भारत की प्रगति को रोकना चाहेंगे... यह इस तरह की चीजें करने के प्रयास की शुरुआत हो सकती है।" यह विश्लेषण वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की बढ़ती शक्ति और उससे जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करता है।

जब देश के पूर्व सैन्य अधिकारी से पूछा गया कि क्या इस तरह की घटनाएं हमारे सुरक्षा बलों के आत्मविश्वास को हिला सकती हैं, तो उन्होंने एक विस्तृत और आश्वस्त करने वाला जवाब दिया। लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि "21वीं सदी की शुरुआत में, हमने लगातार 10 वर्षों तक इस तरह की घटनाओं को घटते देखा था; वे हमारे आत्मविश्वास को पूरी तरह से ठेस पहुंचाती थीं।"

 

जनरल हसनैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी उल्लेख किया कि इस घटना के पीछे के षड्यंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "हमारे नेतृत्व ने सबूत सामने आने तक उंगली न उठाकर परिपक्वता दिखाई है।" 
 

उनके अनुसार, इन घटनाओं से हमारे आत्मविश्वास को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जिस तरह से भारत सरकार ने इस तरह की घटना को संभाला है, उससे लोगों का भरोसा और बढ़ना चाहिए... कि हम उस स्थिति को नहीं आने देंगे जो 90 के दशक या 21वीं सदी की शुरुआत में थी।"
 

लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने 90 के दशक और 21वीं सदी की शुरुआत के उन वर्षों की याद दिलाई जब देश को लगातार आतंकवादी हमलों और धमाकों का सामना करना पड़ता था। उस दौर में, इन घटनाओं का राष्ट्रीय मनोबल पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। हालांकि, उन्होंने वर्तमान स्थिति को उस दौर से काफी अलग बताया है। उनके अनुसार, जिस तरह से वर्तमान सरकार ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे जनता में सुरक्षा की भावना को बढ़ाने वाले हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या दिल्ली विस्फोट का उद्देश्य राजधानी के हृदयस्थल को निशाना बनाकर दहशत फैलाना था
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) कहते हैं, "हमने ऐसा पहले भी देखा है, 13 दिसंबर, 2001 को संसद पर हमला। लेकिन उससे भी हमारा आत्मविश्वास नहीं डगमगाया, इस पारिस्थितिकी तंत्र पर लगातार काम करना होगा, क्योंकि कूटनीतिक रूप से भारत सरकार ने तालिबान के साथ बातचीत का एक शानदार फैसला लिया है। हमने तालिबान के नेतृत्व वाले अफ़गानिस्तान के साथ अपने रिश्ते मज़बूत किए हैं। बहुत से लोग इसकी आलोचना कर रहे थे। मैं भारत सरकार का बहुत समर्थन करता हूं। 

देश सुरक्षित हाथों में है: सैयद अता हसनैन
हाल ही में भारी मात्रा में ज़ब्त किए गए विस्फोटकों पर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) कहते हैं कि "हमें इस बात से दिलासा मिलना चाहिए कि ये सब पता चल गया है... हमें खुफ़िया एजेंसियों के काम से प्रेरणा लेनी चाहिए। देश सुरक्षित हाथों में है और इस समय आप जो कुछ भी देख रहे हैं, वह उन समस्याओं का प्रतीक है जो जारी रहेंगी। हम यह नहीं कह रहे कि यह सब रातोंरात खत्म हो जाएगा, लेकिन मुझे लगता है कि यह सब अच्छी तरह से प्रबंधित हो जाएगा। हमारे पास बहुत बेहतर सुरक्षा व्यवस्था है, विभिन्न मंत्रालयों, विभिन्न संगठनों के सभी प्रकार के लोग एक साथ आ रहे हैं।

दिल्ली धमाकों के बाद क्या ऑपरेशन सिंदूर फिर से चलाया जाएगा, इस सवाल पर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) कहते हैं, "मुझे पता है कि ऑपरेशन सिंदूर 2.0 को लेकर काफ़ी चर्चा हुई है, हमारे पास एक परिपक्व नेतृत्व है जो तय करेगा कि राष्ट्रहित में क्या सबसे अच्छा है। हमें तकनीक, ख़ासकर भविष्यसूचक एआई में और ज़्यादा निवेश की ज़रूरत है। 
 

इसके साथ ही, नागरिकों की सतर्कता बेहद ज़रूरी है... जिस तरह से घटना के बाद लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए... जिस तरह से पुलिस ने कार्रवाई की। केंद्रीय गृह मंत्री कुछ ही घंटों में घटनास्थल पर पहुंच गए और उन्होंने खुद भी घटनास्थल का दौरा किया। इसलिए मुझे लगता है कि इससे हममें काफी आत्मविश्वास पैदा होता है कि हम इस तरह की घटनाओं से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं।
 
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