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अब बाबुओं के जेब में नहीं जा पाएगी लाईसेंसिंग फीस
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 29 Dec 2015 06:35 PM IST
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अब नगर निगम के कर्मचारी लाईसेसिंग फीस वसूलकर अपनी जेब में नहीं रख पाएंगे। निगम ने राजस्व बढ़ाने के लिए लाईसेसिंग फीस रिनूवल के नियमों में परिवर्तन कर दिया है।
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नए नियम के तहत लाईसेङ्क्षसग फीस की फाइल पहले संयुक्त आयुक्त के पास जाएगी। यह जानकारी निगमायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने दी।
उन्होंने बताया कि नए नियम के अनुसार अब धारा 330 व 331 के अंतर्गत आने वाले औद्योगिक व व्यवसायिक इकाईयों को संयुक्त आयुक्त के पास अपनी फाइल भेजनी होगी। संयुक्त आयुक्त इसकी जांच करके नीचे के कर्मचारियों को आदेश देंगे।
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तभी लाईसेसिंग फीस वसूली जा सकेगी। जबकि वर्तमान में सीधे नगर निगम के बाबू लाइसेंस फीस लेकर रसीद काट देते हैं। इससे निगम को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
दहिया का कहना है कि नगर निगम अपने क्षेत्र में हरियाणा म्यूनिसपल कॉरपोरेशन एक्ट 1994 की धारा 330 व 331 के तहत औद्योगिक और व्यवसायिक इकाईयों से सालान लाइसेंस फीस वसूला जाता है।
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ये शुल्क इकाईयों के सालाना टर्नओवर के हिसाब से निर्धारित की जाती है। निगम क्षेत्र के आवासीय क्षेत्रों और औद्योगिक सेक्टरों में कई ऐसी इकाईयां हैं जो अपना लाइसेंस शुल्क निगम को जमा कराती हैं।
यही नहीं उक्त इकाईयां हर साल उसका रिन्यूवल भी कराती हैं। निगम कर्मचारियों के चलते हो रहे नुकसान को देखते हुए ये बदलाव किया गया है।
दहिया ने ये भी बताया कि इस प्रक्रिया में सारे काम पारदर्शी तरीके से होंगे और निगम का राजस्व 10 करोड़ से बढ़ कर 15 करोड़ रूपये के करीब पहुंच जाएगा।