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AAP vs LG: आप नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला, वीके सक्सेना पर लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप

Wed, 31 Aug 2022 07:38 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 31 Aug 2022 07:38 PM IST
सार

आप नेताओं ने उपराज्यपाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। अब इस मामले में  एलजी हाउस की तरफ से जारी बयान में जानकारी दी गई है कि यह उन पर यह आरोपों को झूठे हैं और कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया गया है। 

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lg VK Saxena to take legal action against AAP leaders Saurabh Bhardwaj Atishi Durgesh Pathak and Jasmine Shah
उपराज्यपाल वीके सक्सेना - फोटो : amar ujala

विस्तार

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के तत्कालीन अध्यक्ष (एलजी) के कार्यकाल में दुर्गेश पाठक, आतिशी, सौरभ भारद्वाज और जस्मिन शाह की ओर से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों को झूठा और मानहानि के योग्य मानते हुए उपराज्यपाल ने कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया है।

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सूत्रों के मुताबिक, जिनके बयानों के आधार पर एलजी के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं, नोटबंदी के दौरान केवीआईसी के दो कर्मियों को सीबीआई ने प्रथम दृष्ट्या भ्रष्टाचार में शामिल पाया था। इससे स्पष्ट होता है कि आप की ओर से उन लोगों का उपयोग किया जा रहा है, जो पहले ही भ्रष्टाचार मामले में लिप्त हैं। शिक्षा, शराब और पीडब्ल्यूडी में हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामलों से ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं सहयोगियों की पहचान रही है कि वार करो और भाग जाओ। सच बताने के लिए कहने पर माफी मांग लो। 
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सूत्र बताते हैं कि उपराज्यपाल आप नेताओं पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। इसके खिलाफ खुले तौर पर झूठ बोलने और मानहानि का मामला बनता है। इस मामले में कार्रवाई का फैसला इसलिए लिया गया है कि आप नेता अपनी फितरत से बाज आएं। इससे पहले आप नेताओं ने दावा किया था कि 2016 में नोटबंदी के दौरान एक घोटाले में एलजी शामिल हैं। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

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केवीआईसी ने नौ नवंबर 2016 को जारी कर दिया था सर्कुलर
भारत सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 1000 रुपये और 500 रुपये के नोटों का प्रचलन बंद कर दिया। केवीआईसी ने 9 नवंबर, 2016 को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि 1000 और 500 रुपये के पुराने नोट तत्काल प्रभाव से किसी भी बिक्री आउटलेट और प्रतिष्ठानों की ओर से स्वीकार नहीं किए जाएंगे। बाद में पता चला कि कुछ विमुद्रीकृत नोट खादी ग्रामोद्योग भवन (केजीबी), नई दिल्ली के खाते में अलग अलग तिथियों में जमा करवाए गए थे। इस मामले को तत्काल जांच और कार्रवाई के लिए केवीआईसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पास भेजा गया था। इसके बाद सीबीआई को भी सूचित करने के बाद 6 अप्रैल, 2017 को एक संयुक्त औचक निरीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद सीवीओ ने 17 अप्रैल, 2017 को केजीबी, नई दिल्ली के चार अधिकारियों और कर्मियों के निलंबन को स्थानांतरण की सिफारिश की। इनमें प्रबंधक एके गर्ग, सेल्स इंचार्ज अजय गुप्ता, सेल्समैन-3 (प्रमुख कैशियर) संजीव कुमार मलिक और एलडीसी प्रदीप यादव के नाम शामिल थे। 
 

निष्पक्ष जांच के लिए अधिकारी-कर्मियों का कर दिया गया था तबादला
सीवीओ की सलाह के मुताबिक, चारों अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल निलम्बित कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। सीवीओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 10 नवंबर से 31 दिसंबर 2016 के दौरान दिल्ली में केजीबी बैंक खाते में कुल 22 लाख, 17 हजार रुपये की राशि जमा की गई। इनमें 500 रुपये के 2140 जबकि 1000 के 1147 नोट (अमान्य) 29 मई 2017 को केवीआईसी ने सीवीओ ने चार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में सीबीआई को सूचित किया।

दो आरोपियों के खिलाफ सीबीआई दायर कर चुकी है चार्जशीट, मामला अदालत में लंबित
सीबीआई ने इस मामले की जांच में दो हेड कैशियर संजीव मलिक और प्रदीप यादव की संलिप्तता का खुलासा होने पर 14 जुलाई, 2017 को प्राथमिकी दर्ज की गई। सीवीओ की रिपोर्ट के आधार पर की गई सीबीआई की जांच में सामने आया कि इनमें से केजीबी, नई दिल्ली के खाते में केवल 17,07,000 रुपये के विमुद्रीकृत मुद्रा नोट जमा करवाए थे। सीबीआई ने केजीबी नई दिल्ली की प्रासंगिक नकद जमा पर्ची की जांच में निष्कर्ष निकाला कि कुल नकद जमा राशि 22,17,000 रुपये में से  5,10,000 रुपये वैध मुद्रा थी ना कि 500 और 1000 के प्रतिबंधित नोट। सीबीआई पहले ही दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है और मामला राउज एवेन्यू कोर्ट में लंबित है। 

झूठे आरोप, भुगतने होंगे परिणाम
सूत्रों ने इस मामले में एतराज जताते हुए आप की ओर से लगाए आरोपों को झूठा करार दिया है। इस मामले में 1400 करोड़ रुपये का दावा किया गया था जबकि महज 17.07 लाख रुपये के मामले में दो पर सीबीआई की कार्रवाई चल रही है। यह महज एक कल्पना और मनगढ़ंत आरोपों के अलावा कुछ नहीं है और आदतन झूठ बोलने के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। 

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