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Delhi: सिख विरोधी दंगों के आरोपी को रिहा करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर होगी याचिका, एलजी ने दी मंजूरी

Sat, 25 Nov 2023 07:17 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Sat, 25 Nov 2023 07:17 PM IST
सार

इस मंजूरी के लिए दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने प्रस्ताव भेजा था, जिसे उपराज्यपाल ने मंजूरी दे दी। उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर करने की मंजूरी दिसंबर 2020 में दी गई थी, लेकिन, अपील दो वर्ष से अधिक की देरी के बाद 2023 में दायर की गई थी। 

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LG approves filing petition in Supreme Court against release of anti Sikh riots accused
उपराज्यपाल वीके सक्सेना - फोटो : social media

विस्तार

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में छह आरोपियों को बरी करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने को अनुमति दे दी है। मामले में लापरवाही बरतने के लिए उन्होंने दिल्ली सरकार के अभियोजन विभाग को फटकार भी लगाई है। यह मामला उत्तर पश्चिम दिल्ली के सरस्वती विहार पुलिस स्टेशन (वर्तमान में सुभाष प्लेस) क्षेत्र में दंगों के दौरान हत्या के प्रयास, लूटपाट और दंगे से संबंधित है। इस मामले में हरिलाल, मंगल, धर्मपाल, आजाद, ओम प्रकाश और अब्दुल हबीब छह आरोपी हैं।

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इस मंजूरी के लिए दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने प्रस्ताव भेजा था, जिसे एलजी ने मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट का कहना था कि 28 मार्च 1995 के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने में 28 वर्षों की देरी के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था और राज्य द्वारा उठाए गए आधार उचित नहीं थे। इसी तरह के एक अन्य मामले में उपराज्यपाल द्वारा नांगलोई पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अन्य सिख विरोधी दंगा मामले में 12 लोगों को बरी करने के खिलाफ शीर्ष कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।
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उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर करने की मंजूरी दिसंबर 2020 में दी गई थी, लेकिन, अपील दो वर्ष से अधिक की देरी के बाद 2023 में दायर की गई थी। सक्सेना ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि मानवता के खिलाफ अपराध के ऐसे मामलों को बहुत ही अनौपचारिकता, रूटीन तरीके तथा लापरवाही से निपटाया जाता है, जिससे अपील दायर करने में अधिक देरी होती है।
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उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के गृह विभाग को इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर करने में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी की पहचान करने, जिम्मेदारी तय करने और 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।

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