दिल्ली से सटे गांव में तेंदुए की दहशत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फरीदाबाद गुड़गांव हाईवे से सटे मांगर गांव के पास घने जंगल में तेंदुए के पैरों के निशान देखे गए है। गांव वालों के अनुसार बीते रविवार को तेंदुए के पैरों के निशान देखे गए है।
ग्रामीणों का दावा है कि तेंदुआ एक गाय को खींचकर ले गया और उसे मार दिया। मारने के बाद गाय के मृत शरीर को वहीं छोड़ गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी बड़े जानवरों ने उनके मवेशियों के मारा है, लेकिन पहली बार तेंदुए ने मारा है। कुछ ग्रामीणों ने सुरक्षा को लेकर शिकायत की है। उनका कहना है कि तेंदुआ किसी दिन जंगल से बाहर आकर लोगों पर भी हमला कर सकता है।
मांगर के जंगल में अपने मवेशी चारा रहे चौधरी शुक्ल ने बताया कि रविवार को उसकी एक गाय खो गई थी। जब वह गांव के लोगों के साथ गाय ढूंढ़ने गया तो उन लोगों ने वहां तेंदुए के पैरों के निशान देखे। कहीं तेंदुआ उन पर हमला न कर दे इस डर से वे सब वहां से भाग गए।
अरावली पहाड़ी से आते है जानवर
ग्रामीण सुनील हरसाना ने बताया कि तेंदुए के पैरों के निशान ठीक उसी जगह देखें गए है, जहां कुछ रियल स्टेट कम्पनियां खेतों की जगह बताकर बेच रही है। वैसे तो मांगर जंगल पर्यावरण के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण है। लेकिन अब यह साबित हो गया है कि वहां तेंदुए हैं।
टीओआई के मुताबिक, इसी प्रकार असोला भट्टी सेंचुरी में एक बहुत बड़ी जंगली बिल्ली देखी गई है।
विशेषज्ञ का मनाना है कि राजधानी के चारों ओर अरावली की पहाड़ी होने की वजह से जानवर यहां आते हैं। वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि जानवरों के इस पार से उस पार हरियाणा और राजस्थान जाने का सबसे आसान रास्ता असोला भट्टी सेंचुरी हैं। जिस वजह से जानवर यहां आते है।
एक और अन्य ग्रामीण ने बताया कि यहां और भी ज्यादा पेट्रोलिंग की जरूरत है और शिकारियों की तैनाती की जाए ताकि जानवर यहां अपना आवास न बना पाएं।