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पौने दो माह में तेंदुए ने तीसरी बार फैलाई ग्रेनो में दहशत, वन विभाग ने बताया हो सकता है प्यासा
Mon, 21 Jan 2019 12:36 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: Vikas Kumar
Updated Mon, 21 Jan 2019 12:36 AM IST
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तेंदुआ
- फोटो : फाइल फोटो
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ग्रेनो और आसपास के इलाकों में करीब दो माह में तीन बार लोगों ने तेंदुए को देखने का दावा किया था। इससे पहले दो बार वन अधिकारियों ने देखे गए जानवर के फिशिंग कैट होने की बात कही थी। लेकिन इस बार सादुल्लापुर गांव में तेंदुए को ग्रामीणों के प्रयास व मेरठ वन विभाग की टीम की मदद से पकड़ लिया गया। वन अधिकारियों ने दावा किया कि रविवार को पकड़ा गया तेंदुआ पानी की तलाश में भटककर यहां पहुंचा था।
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ग्रेनो में सबसे पहले 27 नवंबर 2018 को होटल के कमरे से एक शख्स ने फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल की थी। दावा किया गया था कि सेक्टर पी-3 के पास स्थित तेंदुआ देखा गया है। इसके बाद 16 जनवरी को ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ही स्टेलजर जीवन सोसायटी के पास किसी शख्स ने तेंदुए जैसे जानवर की फोटो खींचकर वायरल की थी। दोनों ही स्थान पर वन विभाग ने मौका मुआयना कर जानवर के फिशिंग कैट होने और इससे किसी को कोई क्षति नहीं होने का दावा किया था। इसके ठीक तीन दिन बाद लगभग 10 किमी दूर स्थित सादुल्लापुर गांव में तेंदुआ दिखाई दिया। ग्रामीण उस दिन भी फिशिंग कैट के बजाय इसी तेंदुए के होने की बात आशंका जता रहे हैं।
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वन क्षेत्राधिकारी शीतल पवार से जब यह पूछा गया कि क्या यही तेंदुआ पौने दो माह से शहर में दहशत फैला रहा था, तो उन्होंने फिर से दावा किया है कि पूर्व में दोनों बार यहां फिशिंग कैट देखी गई थी, उनके पंजे से परीक्षण किया गया था।
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करीब आठ साल का है नर तेंदुआ
वन क्षेत्राधिकारी शीतल पवार ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ सात-आठ साल का नर है। तेंदुआ एक रात में ही 30 से 40 किमी का सफर तय कर लेता है। अगर यह शहरी क्षेत्र में अधिक देर रुक जाए, तो कई लोगों पर हमला कर सकता है। इसे प्यास अधिक लगती है, आशंका है कि पानी की तलाश में वह रास्ता भटककर यहां आया होगा।
ट्रेन या मालगाड़ी में बैठकर यमुना खादर तक आने की आशंका
तेंदुआ यहां कैसे और क्यों पहुंचा इसका सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। अंदेशा यह भी है कि ट्रेन या मालगाड़ी में बैठकर वह यमुना खादर के आसपास आ गया होगा। इसके बाद वह सादुल्लापुर गांव तक पहुंचा होगा।- पीके श्रीवास्तव, जिला वन अधिकारी