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बाइक से बचे गार्ड को सांड ने मार डाला
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 23 Dec 2015 01:18 AM IST
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चिरंजीव विहार कट पर बाइक की टक्कर से बचे सिक्योरिटी गार्ड सुदर्शन सिंह (55) को सांड ने टक्कर मारकर जख्मी कर दिया।
सोमवार रात करीब नौ बजे हुई इस घटना के बाद राहगीरों ने गार्ड को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई। इस मामले में गार्ड के बेटे ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है
पुलिस के अनुसार, सुदर्शन सिंह परिवार के साथ डासना के राजीवपुरम में रहते थे। बेटे विनय ने बताया कि सुदर्शन एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड थे। वह सोमवार रात नौ बजे ड्यूटी खत्म कर साइकिल से घर जा रहे थे।
प्रत्यक्षदर्र्शियों ने बताया कि इसी बीच तेज रफ्तार बाइक चालक ने उन्हें टक्कर मार दी। इससे वह गिरकर जख्मी हो गए। उठने की कोशिश कर रहे थे कि तभी वहां लड़ रहे दो सांडों में से एक ने उन्हें कई टक्कर मारीं।
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इस बीच राहगीरों ने किसी तरह उन्हें सांड से बचाकर गंभीर हालत में हीरालाल अस्पताल पहुंचाया। आरोप है कि हीरालाल अस्पताल से उन्हें संयुक्त चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
विनय ने संयुक्त जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का भी आरोप लगाया है। दूसरी तरफ, संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी सिन्हा का कहना है कि अस्पताल में उन्हें मृत अवस्था में लाया गया था।
इलाज में लापरवाही का आरोप निराधार है। एसएचओ कविनगर अशोक सिसौदिया ने बताया कि बाइक चालक की तलाश की जा रही है, जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
सांडों को नहीं पकड़ता नगर निगम
नगर निगम के अफसरों की लापरवाही से जनता की जान पर बन आई है। आए दिन इस लापरवाही की कीमत किसी न किसी को जान देकर चुकानी पड़ती है।
हादसा होते ही निगम के अधिकारी सड़कों पर अवारा पशुओं को घूमने से रोकने के लिए अभियान चलाने का दावा करते हैं, लेकिन यह अभियान दिखावा मात्र बनकर रह जाता है। नगर निगम के अधिकारी लगातार हो रहे हादसों के बाद भी नहीं जागते।
सड़कों पर चलना हुआ मुश्किल
मालीवाड़ा निवासी टीचर राखी चौधरी ने बताया कि हादसों की वजह से सड़कों पर चलना मुश्किल है। कभी अवारा कुत्ते तो कभी सांड आए दिन किसी न किसी को नुकसान पहुंचाते हैं।
पैदल स्कूल कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को डर लगता है। विजयनगर निवासी गौरव भदौरिया ने बताया कि वह बाइक से सफर करते वक्त कई बार अवारा पशु अचानक से सामने आ जाते हैं, जिस वजह से हादसा होने का डर बना रहता है।
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सोमवार रात करीब नौ बजे हुई इस घटना के बाद राहगीरों ने गार्ड को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई। इस मामले में गार्ड के बेटे ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है
पुलिस के अनुसार, सुदर्शन सिंह परिवार के साथ डासना के राजीवपुरम में रहते थे। बेटे विनय ने बताया कि सुदर्शन एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड थे। वह सोमवार रात नौ बजे ड्यूटी खत्म कर साइकिल से घर जा रहे थे।
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प्रत्यक्षदर्र्शियों ने बताया कि इसी बीच तेज रफ्तार बाइक चालक ने उन्हें टक्कर मार दी। इससे वह गिरकर जख्मी हो गए। उठने की कोशिश कर रहे थे कि तभी वहां लड़ रहे दो सांडों में से एक ने उन्हें कई टक्कर मारीं।
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इस बीच राहगीरों ने किसी तरह उन्हें सांड से बचाकर गंभीर हालत में हीरालाल अस्पताल पहुंचाया। आरोप है कि हीरालाल अस्पताल से उन्हें संयुक्त चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
विनय ने संयुक्त जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का भी आरोप लगाया है। दूसरी तरफ, संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी सिन्हा का कहना है कि अस्पताल में उन्हें मृत अवस्था में लाया गया था।
इलाज में लापरवाही का आरोप निराधार है। एसएचओ कविनगर अशोक सिसौदिया ने बताया कि बाइक चालक की तलाश की जा रही है, जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
सांडों को नहीं पकड़ता नगर निगम
नगर निगम के अफसरों की लापरवाही से जनता की जान पर बन आई है। आए दिन इस लापरवाही की कीमत किसी न किसी को जान देकर चुकानी पड़ती है।
हादसा होते ही निगम के अधिकारी सड़कों पर अवारा पशुओं को घूमने से रोकने के लिए अभियान चलाने का दावा करते हैं, लेकिन यह अभियान दिखावा मात्र बनकर रह जाता है। नगर निगम के अधिकारी लगातार हो रहे हादसों के बाद भी नहीं जागते।
सड़कों पर चलना हुआ मुश्किल
मालीवाड़ा निवासी टीचर राखी चौधरी ने बताया कि हादसों की वजह से सड़कों पर चलना मुश्किल है। कभी अवारा कुत्ते तो कभी सांड आए दिन किसी न किसी को नुकसान पहुंचाते हैं।
पैदल स्कूल कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को डर लगता है। विजयनगर निवासी गौरव भदौरिया ने बताया कि वह बाइक से सफर करते वक्त कई बार अवारा पशु अचानक से सामने आ जाते हैं, जिस वजह से हादसा होने का डर बना रहता है।