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शाहीन बाग के प्रदर्शन में अब अगुवाई की होड़, हर दिन होती है कहासुनी और मंच पर बहस
Mon, 17 Feb 2020 09:18 PM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Mon, 17 Feb 2020 09:18 PM IST
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शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी
- फोटो : अमर उजाला
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शाहीन बाग प्रदर्शन की पटकथा का लेखक देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू के स्कॉलर शरजील इमाम को माना जाता है। बताया जाता है कि शरजील सबसे पहले प्रदर्शनस्थल पर लोगों को लेकर बैठा था। इसके बाद उसे दूसरे लोगों का साथ मिलता चला गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शन का नेता बनने की होड़ में कई गुट बन गए हैं। इन गुटों के बीच मंच पर लगभग रोज कहासुनी की नौबत आ रही है। सोमवार को भी कोर्ट की सुनवाई के बाद दोनों गुट मंच पर आपस में भिड़ गए। इसके बाद महिलाओं ने बीच में आकर हंगामे को शांत कराया।
शाहीन बाग के प्रदर्शन की अगुवाई अब कई हाथों में है। सूत्रों की मानें तो पहला गुट विधायक अमानतुल्ला से जुड़ा हुआ है, जो स्थानीय लोगों में हनक बनाए रखना चाहता है। दूसरा गुट वामपंथी छात्रों का है। एक तीसरा गुट भी है, जो पीएफआई से जुड़ा बताया जा रहा है। इन सभी के मतभेदों के कारण शाहीन बाग प्रदर्शन में आपस में फूट दिख रही है।
हर कोई मंच पर अगुवा बनकर खुद को बड़ा नेता साबित करने में जुटा है। देखना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थों से कौन-सा गुट बातचीत करेगा। वैसे इनमें से एक गुट रास्ता खोलने के पक्ष में है। उसका मानना है कि इससे कई लाख लोगों को रोज ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। बाकी के दोनों गुट प्रदर्शन को जारी रखने के पक्ष में हैं।
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शाहीन बाग के प्रदर्शन की अगुवाई अब कई हाथों में है। सूत्रों की मानें तो पहला गुट विधायक अमानतुल्ला से जुड़ा हुआ है, जो स्थानीय लोगों में हनक बनाए रखना चाहता है। दूसरा गुट वामपंथी छात्रों का है। एक तीसरा गुट भी है, जो पीएफआई से जुड़ा बताया जा रहा है। इन सभी के मतभेदों के कारण शाहीन बाग प्रदर्शन में आपस में फूट दिख रही है।
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हर कोई मंच पर अगुवा बनकर खुद को बड़ा नेता साबित करने में जुटा है। देखना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थों से कौन-सा गुट बातचीत करेगा। वैसे इनमें से एक गुट रास्ता खोलने के पक्ष में है। उसका मानना है कि इससे कई लाख लोगों को रोज ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। बाकी के दोनों गुट प्रदर्शन को जारी रखने के पक्ष में हैं।
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