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धनुष टूटते ही परशुराम और लक्ष्मण में हुई तीखी नोक-झोंक
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Mon, 03 Oct 2016 01:09 AM IST
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राम ने तोड़ा धनुष
- फोटो : अमर उजाला
साइबर सिटी की विभिन्न रामलीलाओं में शनिवार रात कई रोचक प्रसंगों का वर्णन किया गया। श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा द्वारा धनुष यज्ञ लीला का शानदार मंचन किया गया।
श्रीराम ने सीता का वरण किया। दर्शकों में उस समय जोश भर गया जब मंच पर लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दोनों के बीच का संवाद इतना रोचक रहा कि दर्शक रोमांचित हो उठे।
जैसे ही श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा पूरा जनकपुर उल्लास से भर गया। तभी राजा जनक के दरबार में महर्षि परशुराम का आगमन होता है। आते ही वह पूछते हैं कि शिव का धनुष किसने तोड़ा। परशुराम के बार-बार पूछने पर जब कोई जवाब नहीं मिला तो वह गुस्सा हो गए।
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उन्होंने कहा कि ‘मूर्ख जनक जल्दी बतला यह धनुष किसने तोड़ा है, इस भरे स्वयंवर में किसने सीता से नाता जोड़ा है, जल्दी उसकी सूरत दिखला बरना चौपट कर डालूंगा, जितना पृथ्वी पर राज तेरा सब उलट-पुलट कर डालूंगा’।
पूरा माहौल भय के वातारण में डूब गया। स्थिति को संभालने के लिए श्रीराम परशुराम के समक्ष आते हैं वह कहते हैं कि ‘शिव धनुष तोड़ने वाला भी कोई शिव का भक्त होगा जिसने यह अपराध किया वह दास तुम्हारा होगा। ’
परशुराम को क्रोध में डूबा देखकर श्रीराम के अनुज लक्ष्मण बीच में आ जाते हैं। दोनों के बीच तीखी नोकझोंक होती है। दर्शकों को खूब मजा आता है। किसी प्रकार से उनका गुस्सा शांत होता है। सीता और राम के विवाह का भव्य मंचन होता है।
रावण बाणासुर संवाद
सती स्वयंवर में पहुंचे रावण और वाणासुर के बीच संवाद होता है। वाणासुर रावण को मना करता है कि यह गुरु जी का धनुष है। इसे मत छूना। रावण सोचता है कि इस घनुष का वजन ज्यादा है इस कारण वह उसे मना कर रहा है। इस पर रावण कहता है कि ओ वाणासुर यह जगत सारा मेरे सामने सरसों सम है।
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श्रीराम ने सीता का वरण किया। दर्शकों में उस समय जोश भर गया जब मंच पर लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दोनों के बीच का संवाद इतना रोचक रहा कि दर्शक रोमांचित हो उठे।
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जैसे ही श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा पूरा जनकपुर उल्लास से भर गया। तभी राजा जनक के दरबार में महर्षि परशुराम का आगमन होता है। आते ही वह पूछते हैं कि शिव का धनुष किसने तोड़ा। परशुराम के बार-बार पूछने पर जब कोई जवाब नहीं मिला तो वह गुस्सा हो गए।
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उन्होंने कहा कि ‘मूर्ख जनक जल्दी बतला यह धनुष किसने तोड़ा है, इस भरे स्वयंवर में किसने सीता से नाता जोड़ा है, जल्दी उसकी सूरत दिखला बरना चौपट कर डालूंगा, जितना पृथ्वी पर राज तेरा सब उलट-पुलट कर डालूंगा’।
पूरा माहौल भय के वातारण में डूब गया। स्थिति को संभालने के लिए श्रीराम परशुराम के समक्ष आते हैं वह कहते हैं कि ‘शिव धनुष तोड़ने वाला भी कोई शिव का भक्त होगा जिसने यह अपराध किया वह दास तुम्हारा होगा। ’
परशुराम को क्रोध में डूबा देखकर श्रीराम के अनुज लक्ष्मण बीच में आ जाते हैं। दोनों के बीच तीखी नोकझोंक होती है। दर्शकों को खूब मजा आता है। किसी प्रकार से उनका गुस्सा शांत होता है। सीता और राम के विवाह का भव्य मंचन होता है।
रावण बाणासुर संवाद
सती स्वयंवर में पहुंचे रावण और वाणासुर के बीच संवाद होता है। वाणासुर रावण को मना करता है कि यह गुरु जी का धनुष है। इसे मत छूना। रावण सोचता है कि इस घनुष का वजन ज्यादा है इस कारण वह उसे मना कर रहा है। इस पर रावण कहता है कि ओ वाणासुर यह जगत सारा मेरे सामने सरसों सम है।