{"_id":"5edcb5868ebc3e905e2bc794","slug":"late-ved-prakash-marwah-life-story-he-used-to-visit-goa-every-year-on-doctors-suggestion","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"स्मृति शेषः डॉक्टर की सलाह पर हर साल गोवा जाते थे वेद, इस बार लौटने से पहले लग गया था लॉकडाउन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्मृति शेषः डॉक्टर की सलाह पर हर साल गोवा जाते थे वेद, इस बार लौटने से पहले लग गया था लॉकडाउन
Sun, 07 Jun 2020 03:08 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sun, 07 Jun 2020 03:08 PM IST
विज्ञापन
वेद प्रकाश मारवाह (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त और तीन राज्यों के राज्यपाल रहे वेद प्रकाश मारवाह डॉक्टर की सलाह पर हर साल गोवा जाते थे। इस बार भी उन्हें मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल की शुरुआत में दिल्ली लौटना था, लेकिन लॉकडाउन के कारण वे वहीं फंस गए। उनके निधन पर दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दुख जाहिर किया।
गोवा में ही शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहां उनके इकलौते बेटे समेत परिवार के चंद लोग मौजूद रहे। दिल्ली के खान मार्केट में रहने वाले वेद प्रकाश मारवाह के भाई के पोते अभिनव बाम्ही ने बताया कि विभाजन के समय 1947 में उनका परिवार पाकिस्तान के पेशावर से दिल्ली आया था।
परिवार ने दिल्ली के राजेंद्र नगर में रहना शुरू किया। उसी समय परिवार को सरकार की ओर से दिल्ली के खान मार्केट में एक प्लॉट मिल गया। यहां मकान बनाने के बाद वेद प्रकाश का पूरा परिवार खान मार्केट शिफ्ट हो गया। यहीं उनके पिता फकीरचंद ने किताबों की एक दुकान फकीरचंद एंड संस बुक स्टोर की शुरुआत की, जो आज भी मौजूद है। बाद में उन्होंने पढ़ाई की और आईपीएस अधिकारी बन गए।
विज्ञापन
अभिनव बाम्ही ने बताया कि 1995 में उन्होंने भारत में आतंकवाद पर एक किताब भी लिखी थी। उम्र बढ़ने के साथ उनकी तबीयत खराब रहने लगी। उन्हें फेफड़ों की गंभीर बीमारी हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें सर्दियों के समय किसी गर्म राज्य में रहने की सलाह दी थी।
इस कारण से वे सर्दियों की शुरुआत में गोवा चले जाते थे। नवंबर 2019 में वे गोवा गए थे। मार्च या अप्रैल के प्रथम सप्ताह में उन्हें घर आना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से वहीं रुक गए। उनके इकलौते बेटे दिल्ली में वकालत करते हैं।
पिछले कुछ दिनों से मारवाह की तबीयत खराब थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता की हालत का पता चलते ही उनके बेटे भी गोवा पहुंच गए थे। शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे अस्पताल में वेद प्रकाश मारवाह ने अंतिम सांस ली।
विज्ञापन
गोवा में ही शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहां उनके इकलौते बेटे समेत परिवार के चंद लोग मौजूद रहे। दिल्ली के खान मार्केट में रहने वाले वेद प्रकाश मारवाह के भाई के पोते अभिनव बाम्ही ने बताया कि विभाजन के समय 1947 में उनका परिवार पाकिस्तान के पेशावर से दिल्ली आया था।
विज्ञापन
परिवार ने दिल्ली के राजेंद्र नगर में रहना शुरू किया। उसी समय परिवार को सरकार की ओर से दिल्ली के खान मार्केट में एक प्लॉट मिल गया। यहां मकान बनाने के बाद वेद प्रकाश का पूरा परिवार खान मार्केट शिफ्ट हो गया। यहीं उनके पिता फकीरचंद ने किताबों की एक दुकान फकीरचंद एंड संस बुक स्टोर की शुरुआत की, जो आज भी मौजूद है। बाद में उन्होंने पढ़ाई की और आईपीएस अधिकारी बन गए।
विज्ञापन
अभिनव बाम्ही ने बताया कि 1995 में उन्होंने भारत में आतंकवाद पर एक किताब भी लिखी थी। उम्र बढ़ने के साथ उनकी तबीयत खराब रहने लगी। उन्हें फेफड़ों की गंभीर बीमारी हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें सर्दियों के समय किसी गर्म राज्य में रहने की सलाह दी थी।
इस कारण से वे सर्दियों की शुरुआत में गोवा चले जाते थे। नवंबर 2019 में वे गोवा गए थे। मार्च या अप्रैल के प्रथम सप्ताह में उन्हें घर आना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से वहीं रुक गए। उनके इकलौते बेटे दिल्ली में वकालत करते हैं।
पिछले कुछ दिनों से मारवाह की तबीयत खराब थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता की हालत का पता चलते ही उनके बेटे भी गोवा पहुंच गए थे। शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे अस्पताल में वेद प्रकाश मारवाह ने अंतिम सांस ली।
37 साल तक पुलिस विभाग में दी सेवाएं
करीब 37 साल तक आईपीएस के रूप में नौकरी करने वाले मारवाह 1985 से 1988 के बीच दिल्ली के पुलिस आयुक्त रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें 1988 से 1990 के बीच नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) का महानिदेशक बनाया गया।
इसके बाद सन 1999 से 2000 के बीच वे मणिपुर के राज्यपाल रहे। 2000 से 2001 के बीच वे मिजोरम के राज्यपाल रहे। जून 2003 से दिसंबर 2004 के बीच वे झारखंड के चौथे राज्यपाल रहे। उनके निधन पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी ट्वीट कर दुख जताया। ट्विटर पर कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद सन 1999 से 2000 के बीच वे मणिपुर के राज्यपाल रहे। 2000 से 2001 के बीच वे मिजोरम के राज्यपाल रहे। जून 2003 से दिसंबर 2004 के बीच वे झारखंड के चौथे राज्यपाल रहे। उनके निधन पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी ट्वीट कर दुख जताया। ट्विटर पर कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।