मथुरा में जमीन घोटाला: पीसी गुप्ता के कार्यकाल में कर्ज लेकर खरीदी 3000 करोड़ की जमीन
मथुरा में मास्टर प्लान से बाहर 126 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने के खुलासे के साथ कई और परतें खुलने लगी हैं। पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता के समय में यमुना प्राधिकरण ने कई बैंकों से सबसे ज्यादा कर्ज लिया। दो साल की अवधि में यीडा ने 3172 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
इसमें से ज्यादातर रकम बेवजह की जमीन खरीदने में खर्च की गई। कुल कर्ज का करीब 50 फीसदी अकेले नोएडा प्राधिकरण ने दिया। पीसी गुप्ता 16 अप्रैल 2013 से 10 जून 2015 तक यमुना प्राधिकरण के सीईओ रहे। सूत्रों के मुताबिक, इस अवधि में करीब 3172 करोड़ रुपये कर्ज लिए गए, जिसमें से सबसे ज्यादा कर्ज 1650 करोड़ रुपये नोएडा प्राधिकरण ने दिया। करीब 350 करोड़ रुपये एचडीएफसी बैंक, 552 करोड़ रुपये ओबीसी बैंक व 620 करोड़ रुपये का कर्ज पंजाब एंड सिंध बैंक ने दिया।
बड़े पैमाने पर कर्ज लेने की वजह से यमुना प्राधिकरण का कर्ज पहली बार 3000 करोड़ रुपये से पार पहुंच गया। यह मूल रकम है। अगर इस पर ब्याज जोड़ लिया जाए तो रकम काफी बढ़ जाएगी। इस रकम को विकास कार्यों पर खर्च करने की जगह जमीन खरीदने में लगाया गया।
जीरो पीरियड की गड़बड़ी में भी पीसी गुप्ता का नाम
उन जगहों पर जाकर जमीन खरीदी, जहां पर प्राधिकरण का कोई योजना नहीं थी। उस दौरान सत्ता के करीबी नेता, अधिकारी व उनके रिश्तेदार किसानों से जमीन खरीदते और फिर उनसे प्राधिकरण जमीन खरीद लेता। इसके एवज में बढ़ा-चढ़ाकर मुआवजा दिया जाता। इस कारगुजारी से यमुना प्राधिकरण कर्ज के नीचे इतना दब गया कि किसी तरह की बड़ी परियोजना लाने की स्थिति में नहीं आ रहा। अब कर्ज ढाई हजार करोड़ रुपये से कम पर पहुंच गया है।
शासन के निर्देश पर यीडा में जीरो पीरियड प्रकरणों की जांच शुरू हो गई है, जबकि नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के प्रकरणों की जांच जल्द होने जा रही है। यीडा में बिल्डरों को इस पीरियड का लाभ देने में भी पीसी गुप्ता का नाम सबसे आगे है। वर्ष 2010 से 2016 के बीच जीरो पीरियड की जांच हो रही है जबकि पीसी गुप्ता 2013 से 2015 तक यीडा में सीईओ के पद पर तैनात रहे। उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा बिल्डरों को इसका लाभ दिया गया।