OMG! कहां गायब हो गई 1200 एकड़ जमीन
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नोएडा की करीब 1200 एकड़ जमीन गायब है। ये वह भूमि है, जिसे अधिसूचना से ही बाहर रखा गया। प्राधिकरण के वर्क सर्किल और भूलेख विभाग को सर्वे के दौरान अब इस बारे में जानकारी हुई है। नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचना के दायरे में कुल 81 गांव हैं। इन गांवों की जमीन अलग-अलग समय पर अर्जित की गई है। अर्जन अब भी जारी है। कुछ जमीनें समझौते के आधार पर तो कुछ बैनामे से ली गई। भू-अर्जन के दौरान लेखपाल-पटवारी ही मौके पर जाते हैं। उनकी रिपोर्ट पर धारा-4 से लेकर धारा-9 तक की प्रक्रिया पूरी की जाती है। अगर उनकी नजर से जमीन बच गई तो वह भूमि अधिग्रहण से बच जाती जाती है। बताया जा रहा है जमीन की कीमत करीब 8000 करोड़ रुपये है।
इस तरह से अब तक करीब 1200 एकड़ जमीन छोड़े जाने की सूचना मिल रही है। जिस पर धारा-4 (अधिग्रहण की अधिसूचना) ही नहीं हुई, धारा-6 (अधिग्रहण) और धारा-9 (कब्जा) तो दूर की बात है। धारा-4 नहीं होने से ये जमीन प्राधिकरण के सामने आ ही नहीं पाई। इसमें प्राधिकरण के निचले स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों और भूमाफिया के मिलीभगत की भी आशंका है।
दरअसल, पैसे कमाने की लालच में भूमाफिया किसानों से सस्ती दर पर जमीन खरीद लेते हैं। इसके बाद धारा-4 के समय प्राधिकरण के कर्मचारियों से मिलीभगत कर संबंधित खसरा नंबर को धारा-4 से ही बाहर करवा लेते हैं। यह खेल नोएडा के ज्यादातर गांवों में हुआ। छोटे-छोटे टुकड़ों में यह जमीन बची हुई है। वर्क सर्किल में तैनात इंजीनियर जब मौके पर जाते हैं तो पता चलता है कि उस जमीन की धारा-4 हुई ही नहीं है। ऐसे ही कई मामले सामने आने के बाद भूलेख विभाग ने सर्वे किया तो करीब 1200 एकड़ जमीन का पता चला।
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भूमाफिया ने बिगाड़ दी सूरत
भूमाफिया धारा-4 से बाहर होते ही उस जमीन पर कॉलोनी काटने और अवैध तरीके से फ्लैट बनाकर बेचने लगते हैं। छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन होने के कारण प्राधिकरण इसे अधिग्रहित भी नहीं कर पाता, क्योंकि इस पर न तो सेक्टर बस सकता है और न ही कोई प्रोजेक्ट आ सकता है। यही कारण रहा कि जमीन नहीं होने से गांव के रास्ते बंद हो गए। भंगेल समेत ज्यादातर गांव के पास बिल्डरों ने प्रोजेक्ट खड़े कर दिए। पिछले दिनों जब प्राधिकरण ने अभियान चलाया तो कई बिल्डरों के प्रोजेक्ट रुके पड़े हैं। लोगों का करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं।
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जमीन की कीमत अरबों में
नोएडा में 1200 एकड़ जमीन की कीमत अरबों में आंकी जा रही है। एक एकड़ में करीब 4000 वर्गमीटर होते हैं। अगर 40 फीसदी भूमि को विकास कार्य के लिए निकाल दें तो भी 60 फीसदी यानी करीब 700 एकड़ जमीन को रिहायश या अन्य कामों में लिया जा सकता था। मौजूदा समय में रिहायश के हिसाब से सबसे निम्न श्रेणी (ई श्रेणी) का आवासीय रेट 29,600 रुपये है। इस रेट से भी 28 लाख वर्गमीटर जमीन की कीमत 8,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा होने का आकलन है।
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एफएनजी की राह में भी रोड़ा
अधिग्रहण से बाहर रही कुछ जमीन ऐसी भी है, जो एफएनजी की राह में भी आ रही है। सोरखा, ककराला, गढ़ी चौखंडी आदि गांवों में ऐसी जमीनें रोड़ा बन रही हैं। इसके अलावा इन गांवों में राज्य सरकार के खाते में पड़ी जमीन नहीं मिलने से भी परेशानी बढ़ गई है। सोरखा में मात्र 400 मीटर की दूरी में एफएनजी का काम जमीन के चक्कर में रुका हुआ है। राज्य सरकार के खाते की यह भूमि अगर प्राधिकरण को मिल जाए तो सड़क का निर्माण पूरा हो सकता है और छिजारसी से फेज-2 तक एफएनजी मार्ग बनकर शुरू हो सकता है। एक्सप्रेसवे के आसपास भी जमीन की अड़चन के चलते एफएनजी का काम पूरा नहीं हो पा रहा। प्राधिकरण जल्द ही इस मसले को जिलाधिकारी के समक्ष रखेगा।