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जमीन अधिग्रहण को लेकर हुड्डा और रॉबर्ट वाड्रा फिर फंसे, गुरुग्राम में एक और केस दर्ज

Sun, 02 Sep 2018 05:56 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 02 Sep 2018 05:56 AM IST
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Land acquisition case against haryana ex cm bhupinder singh hooda and robert vadra

नियमों को ताक पर रखकर जमीन आवंटन करने व कॉलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस देने के दस साल पुराने मामले में खेड़कीदौला थाना पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रॉबर्ट वाड्रा और  डीएलएफ व मैसर्स ओंकेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज किया है। हुड्डा और वाड्रा के खिलाफ भू्मि घोटाले में यह पहला मामला बताया जा रहा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि यह चुनाव का मौसम है, तेल की कीमत बढ़ रही है लेकिन लोगों के मुद्दों से ध्यान भटकाकर मेरे पुराने मामले पर दिया जा रहा है। इसमें कुछ नया नहीं है

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आरोप है कि गांव शिकोहपुर में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट ने बोगस चेक के जरिए 3.5 एकड़ जमीन 7.50 करोड़ रुपये में खरीदकर इस पर कॉलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस लिया था और 58 करोड़ रुपये में डीएलएफ को बेच दिया था। इसके बाद गांव वजीराबाद में नियमों को ताक पर रखकर रॉबर्ट वाड्रा को करीब 5 हजार करोड़ रुपये की 350 एकड़ जमीन अलॉट की गई थी। 

पुलिस के अनुसार गांव राठीवास तावडू निवासी सुरेंद्र सिंह ने वर्ष 2008 में पुलिस को शिकायत दी थी कि वर्ष 2007 में स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी कंपनी रजिस्टर्ड हुई थी, जिसकी कुल पूंजी एक लाख रुपये थी। इस कंपनी के निदेशक रॉबर्ट वाड्रा थे। वर्ष 2008 में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी ने गांव शिकोहपुर के सेक्टर-83 में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसके लिए चेक के माध्यम से 7.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।

आरोप है कि यह जमीन बोगस चेक के जरिए खरीदी गई थी। इस जमीन को खरीदने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने अपने वर्चस्व का प्रभाव दिखाते हुए कमर्शियल कॉलोनी विकसित करने के लिए टाउन एवं कंट्री प्लानिंग से लाइसेंस लिया था। इस विभाग पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अधीन था। लाइसेंस मिलने के बाद वाड्रा ने यह जमीन 58 करोड़ रुपये में डीएलएफ को बेच दी। आरोप है कि जमीन बेचने के बाद नियमों को ताक पर रखते हुए गांव वजीराबाद की 5 हजार करोड़ रुपये की 350 एकड़ जमीन भी वाड्रा को आवंटित कर दी गई।
 

रद्द हुआ था इंतकाल

जमीन आवंटन के बाद उसका इंतकाल भी दर्ज कर दिया गया था। स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी को जमीन आवंटन करने व नियमों को ताक पर रखकर लाइसेंस जारी करने का घोटाला उजागर होने पर तत्कालीन डॉयरेक्टर जनरल ऑफ लैंड रिकॉर्ड कॉन्सोलोडेशन ने इंतकाल रद्द कर दी थी। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गैर कानूनी तरीके से 3 सदस्यीय कमेटी गठित की और इंतकाल रद्द करने के आदेश को ही निरस्त कर दिया। 

वर्ष 2008 में शिकायत मिली थी, जिस पर जांच की जा रही थी। जांच के बाद शनिवार को मामला दर्ज कर लिया गया है। - राजेश सिंह, पुलिस उपायुक्त, मानेसर


घोषित तौर पर डीएलएफ की सहायक कंपनी थी ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज 
शिकोहपुर जमीन घोटाले में जिस ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से लेनदेन के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ था। वह अघोषित तौर पर डीएलएफ की सहायक कंपनी ही थी। जिसके नाम पर शिकोहपुर के दो किसान भाईयों से करीब 27 लाख रूपए एकड़ के हिसाब से पूरी जमीन एक करोड़ रूपए में खरीद थी।

हालांकि इस पूरे प्रकरण में डीएलएफ ने ही पर्दे के पीछे से मुख्य भूमिका निभाते हुए औने पौने दामों पर खरीदी गई जमीन को सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी को 7.50 करोड़ में बेच दी थी। जानकारी के मुताबिक वाड्रा की कंपनी ने कॉमर्शियल लाइसेंस लेते हुए यह जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेच दी थी। इस पूरे प्रकरण में डीएलएफ की खेल की शुरुआत ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के रूप में की गई थी जिसके बाद यह पूरा घोटाला पांच हजार करोड़ का हो गया। 

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