क्रूजॉन सिंड्रोम पीड़ित बच्ची को मिली नई जिंदगी, इलाज को ओमान से आई थी भारत
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क्रूजॉन सिंड्रोम से पीड़ित ओमान की छह वर्ष बच्ची को भारत में नई जिंदगी मिली है। फोर्टिस हेल्थकेयर के प्लास्टिक व कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. रश्मि तनेजा के मुताबिक यह एक आनुवांशिक बीमारी है, जो या तो जन्म के समय या बहुत कम उम्र में दिखती है।
इस बच्ची के इलाज के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने लेफोर्ट थ्री ऑस्ट्रियोटॉमी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें चेहरे के बीच के हिस्सों को खोपड़ी की हड्डी से रिजिड एक्सटर्नल डिस्ट्रैक्टर्स की मदद से अलग कर दिया गया। इसे रेड डिवाइस भी कहा जाता है।
डॉ. तनेजा के मुताबिक, सर्जरी करने के चार दिनों के बाद मरीज के चेहरे के बीच के हिस्से और ऊपरी जबड़ों को एक मिमी प्रतिदिन की दर से आगे की तरफ बढ़ाया गया।
करीब 35 दिनों तक इस प्रक्रिया को दोहराया गया, जिसमें 35 मिमी तक खींचा गया। अब बच्ची की हालत में सुधार हो रहा है, हालांकि सोलह साल की उम्र में फिर उसकी सर्जरी करनी होगी।
जानिए क्या है क्रूजॉन सिंड्रोम
डॉ. तनेजा के मुताबिक, पिता अली हल्थी ने बताया कि जब बच्ची का जन्म हुआ तो वह सामान्य थी, लेकिन चार से पांच महीने की होते ही उसके चेहरे के ऊपरी हिस्से में गड़बड़ी दिखाई देने लगी और जबड़ा भी बिगड़ने लगा।
उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसके बाद वहां के स्थानीय अस्पताल में ट्रैकियोस्टोमाइज्ड के अलावा कार्नियल सर्जरी भी करवानी पड़ी, क्योंकि सिर का आकार नहीं बढ़ रहा था।
क्रूजॉन सिंड्रोम
कार्नियल सूचर के फ्यजून को कार्नियोसिनोटाइटिस भी कहा जाता है, जिसमें सिर का आकार नहीं बढ़ता है। यदि इसका ऑपरेशन नहीं किया जाता है तो मानसिक बीमारी भी हो सकती है। इसमें आंख की पलकों में टेढ़ापन, चौड़ी और आंखें उभरी हुई दिखती हैं। करीब 55 फीसदी बच्चों या मरीजों की सुनने की शक्ति भी चली जाती है।