{"_id":"bf96d2ca357e9490932b6a1ad2e85e91","slug":"koli-was-not-the-dominant-fear-of-death-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोली पर कभी हावी नहीं हुआ मौत का खौफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोली पर कभी हावी नहीं हुआ मौत का खौफ
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 14 Sep 2014 12:55 AM IST
विज्ञापन
निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को चार सितंबर को मेरठ जेल भेजा गया। तब से उसकी फांसी पर रोक लगने तक कोली के हाव-भाव में खास परिवर्तन नहीं हुआ। उसका व्यवहार सामान्य रहा। फांसी का डर भी नहीं दिखा।
विज्ञापन
जेल अधिकारियों का कहना है कि कोली ने हर दिन भरपेट भोजन किया। धार्मिक पुस्तक पढ़ता रहा। जब भी हाई सिक्योरिटी बैरक में पहुंचकर जेल अफसर ने पूछा कि कोली ठीक हो, तो उसने हां में ही जवाब दिया।
विज्ञापन
इसके अलावा उसने कोई खास इच्छा भी जाहिर नहीं की। सामान्य बंदियों की तरह ही समाचार पत्र भी पढ़े और उन्हीं की तरह खाना खाया।
यही नहीं डेथ वारंट पर 29 अक्तूबर तक रोक लगने की जानकारी कोली हुई, तब भी उसके व्यवहार में बदलाव नहीं आया। न पहले गम था, न अब खुशी है।