जानिए, दिल्ली को क्यों लगते रहते हैं भूकंप के झटके
श्रीनगर से लेकर अरुनाचल प्रदेश तक की हिमालयन बेल्ट भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। दिल्ली के लोगों को मुख्यत: तीन तरह से भूकंप के झटके लगते हैं।
नवीनतम सिद्घांत के मुताबिक इंडियन प्लेट और यूरेएशियन प्लेट हिमालयीय प्रदेशों में मिलते हैं। इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट को धक्का देते रहता है जिसके कारण वहां पर अक्सर भूकंप आते रहते हैं।
उसके झटके दिल्ली के लोगों को भी झेलने पड़ते हैं। मेटर फॉल्ट लाइन के साथ-साथ के इलाकों को भूकंप के झटके झेलने पड़ते हैं। यह मेजर फॉल्ट गुजरात, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से होकर गुजरती है।
ऐसा हुआ तो दिल्ली में स्थिति क्या होगी?
पड़ोसी राज्य हरियाणा व उत्तर प्रदेश से होकर छोटी-छोटी फॉल्ट लाइन गुजरती हैं जिनके आसपास भूकंप के झटके लगते रहते हैं। सामान्य रूप से ऐसे भूकंप की तीव्रता कम होती है।
ऐसा हुआ तो दिल्ली में स्थिति क्या होगी?
पाइपलाइन : जमीन के अंदर की पानी की पाइपलाइनों के फटने से भारी तबाही हो सकती है।
मकान : ज्यादातर इमारतें भूकंप का एक झटका भी बर्दाश्त नहीं कर सकतीं, क्योंकि इनकी नींव कमजोर है। खासकर पुरानी दिल्ली की इमारतें खास्ताहाल हैं।
तंग गलियां : गलियां इतनी तंग और संकरी है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में व्यक्ति घर से बाहर ही नहीं निकल पाएगा और निकल भी गया तो गली पार करना दूभर होगा।
फायर ब्रिगेड : भूकंप की स्थिति में तंग गलियों (जहां सबसे अधिक नूकसान होगा) में फायर ब्रिगेड वालों के लिए राहत कार्य करना और फंसे लोगों को निकाल पाना मुश्किल होगा।
मेट्रो रेल : रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.5 तक मेट्रो को कोई नूकसान की संभावना नहीं है। मेट्रो स्टेशन, वायाडक्ट्स और अंडरग्राउंड टनल का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि वह 7.5 तीव्रता वाले भूकंप के झटके को झेल सकें।