अनाथ बेटियों को किन्नर समाज भेज रहा सरगी: 'रिश्ते सिर्फ खून के नहीं, दिल के होते हैं', धारणा के साथ कर रहे काम
अनीता नाम की किन्नर हर साल गरीब और अनाथ बेटियों के लिए सरगी भेजती हैं, ताकि किसी का त्योहार अधूरा न रहे। उनके लिए करवाचौथ केवल आस्था का नहीं, बल्कि प्रेम और मानवता का प्रतीक है।
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करवाचौथ पर जहां सुहागिनें अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही हैं, वहीं किन्नर समाज की महिलाएं इस पर्व को खास अंदाज में मना रही हैं। इंसानियत और अपनापन की मिसाल पेश करती दक्षिणी दिल्ली की रहने वाली रूही, जाह्नवी और अनीता की कहानी हर किसी के दिल को छू लेने वाली है।
रूही और जाह्नवी हर साल अपनी मुंहबोली बहन के घर करवाचौथ की सरगी और मायके से आने वाले सभी पारंपरिक सामान भेजती हैं। इनमें कपड़े, पूजा की सामग्री, मिठाई और उपहार शामिल होते हैं। उनका मानना है कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं, दिल के होते हैं और करवाचौथ जैसे त्योहार उन रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं।
वहीं, अनीता हर साल गरीब और अनाथ बेटियों के लिए सरगी भेजती हैं, ताकि किसी का त्योहार अधूरा न रहे। उनके लिए करवाचौथ केवल आस्था का नहीं, बल्कि प्रेम और मानवता का प्रतीक है। बीते साल उनके गोद लिए बेटे की पत्नी का हार्ट अटैक से निधन हो गया था, जिससे उनके घर में सन्नाटा छा गया, लेकिन अनीता ने हार नहीं मानी।
उन्होंने इस बार भी बहू की याद में सास वाली सरगी सजाई और कहा कि जिंदगी रुकती नहीं, बस रूप बदलकर आगे बढ़ती है। अगर मेरे हाथों से किसी का दिन मीठा हो जाए, तो वही असली पूजा है। रूही, जाह्नवी और अनीता जो कि किन्नर समाज की महिलाएं दिखाती हैं कि त्योहार सिर्फ परंपराओं का नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का अवसर है। वहां आस्था के साथ इंसानियत भी झलकती है।