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यातायात नियम ताक पर रख फर्राटा भर रहे बच्चे, हो रहे हादसों का शिकार
अमित भाटिया/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 27 Oct 2017 06:05 PM IST
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यातायात नियमों को रौंद कर सड़कों पर फर्राटा भरते बच्चों के साथ होने वाले हादसों के लिए काफी हद तक उनके अभिभावक जिम्मेदार हैं, जो बच्चों के खेलने कूदने की उम्र में उनके हाथों में कार का स्टेरिंग या बाइक का हैंडल पकड़वा देते हैं।
बल्लभगढ़ फ्लाईओवर पर बुधवार रात को हुए सड़क हादसे में दो किशोरों की मौत इसी ओर इशारा कर रही है। पुलिस की ओर से लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद कोई सुधरने और इस तरह के हादसों से सबक लेने को तैयार नहीं है।
सड़कों पर तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाते बच्चों को कभी भी देखा जा सकता है। आलम यह होता है कि बच्चों ने हेलमेट नहीं पहन रखा होता है और दो से तीन किशोर बाइक पर सवार हो जाते हैं।
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बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए यातायात पुलिस नियमित रूप से स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाती है। हर साल यातायात नियमों पर आधारित प्रतियोगिता करवाई जाती है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है।
इस तरह के हादसों को रोकने के लिए अभिभावकों के साथ स्कूलों को भी कड़े कदम उठाने की जरूरत है। स्कूलों में एक बच्चा स्कूटी या बाइक लाता है तो उसे देखा देखी दूसरे बच्चे भी लाने लगते हैं। पहले तो अभिभावकों को ही चाहिए कि वे बच्चों को बाइक या स्कूटी न दें। फिर स्कूल प्रबंधन भी इसमें सख्ती बरते और जो बच्चा वाहन लेकर स्कूल आता है तो उसे चेतावनी दें, अभिभावकों को बुलवाकर समझाएं तो वे जरूर मानेंगे। बच्चों पर उनके अध्यापकों की कही बातों पर गहरा असर पड़ता है और वे उसे मानते भी हैं।- एसके शर्मा, उपाध्यक्ष, रोड सेफ्टी आर्गेनाइजेशन
पुलिस लोगों को समझाने के साथ सख्ती भी करती है। मगर कोई सुधरने को तैयार नहीं है। हम किसी को कितना भी पढ़ा लें, अगर कोई सीखने को या सुधरने को ही तैयार नहीं है तो उसमें कुछ नहीं किया जा सकता है। नाबालिग वाहन चालकों के साथ उनके अभिभावकों का भी चालान किया जाता है कि उन्होंने बिना लाइसेंस बच्चे को वाहन क्यों थमाया। इसके बावजूद वे गलती मानने की बजाय और बच्चों को सुधारने की बजाय तरह-तरह के बहाने बनाते हैं।- विरेंद्र विज, डीसीपी ट्रैफिक
जनवरी से सितंबर 2016 में हुए चालान का ब्यौरा
नाबालिग वाहन चालक : 866
अनाधिकृत व्यक्ति को वाहन चलाने के लिए देना : 756
बिना हेलमेट वाहन चलाना : 95260
दोपहिया वाहन पर तीन सवारी : 8938
दोपहिया वाहन पर बिना हेलमेट के पिछली सवारी : 47888
खतरनाक तरीके से वाहन चलाना : 3369
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बल्लभगढ़ फ्लाईओवर पर बुधवार रात को हुए सड़क हादसे में दो किशोरों की मौत इसी ओर इशारा कर रही है। पुलिस की ओर से लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद कोई सुधरने और इस तरह के हादसों से सबक लेने को तैयार नहीं है।
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सड़कों पर तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाते बच्चों को कभी भी देखा जा सकता है। आलम यह होता है कि बच्चों ने हेलमेट नहीं पहन रखा होता है और दो से तीन किशोर बाइक पर सवार हो जाते हैं।
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बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए यातायात पुलिस नियमित रूप से स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाती है। हर साल यातायात नियमों पर आधारित प्रतियोगिता करवाई जाती है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है।
इस तरह के हादसों को रोकने के लिए अभिभावकों के साथ स्कूलों को भी कड़े कदम उठाने की जरूरत है। स्कूलों में एक बच्चा स्कूटी या बाइक लाता है तो उसे देखा देखी दूसरे बच्चे भी लाने लगते हैं। पहले तो अभिभावकों को ही चाहिए कि वे बच्चों को बाइक या स्कूटी न दें। फिर स्कूल प्रबंधन भी इसमें सख्ती बरते और जो बच्चा वाहन लेकर स्कूल आता है तो उसे चेतावनी दें, अभिभावकों को बुलवाकर समझाएं तो वे जरूर मानेंगे। बच्चों पर उनके अध्यापकों की कही बातों पर गहरा असर पड़ता है और वे उसे मानते भी हैं।- एसके शर्मा, उपाध्यक्ष, रोड सेफ्टी आर्गेनाइजेशन
पुलिस लोगों को समझाने के साथ सख्ती भी करती है। मगर कोई सुधरने को तैयार नहीं है। हम किसी को कितना भी पढ़ा लें, अगर कोई सीखने को या सुधरने को ही तैयार नहीं है तो उसमें कुछ नहीं किया जा सकता है। नाबालिग वाहन चालकों के साथ उनके अभिभावकों का भी चालान किया जाता है कि उन्होंने बिना लाइसेंस बच्चे को वाहन क्यों थमाया। इसके बावजूद वे गलती मानने की बजाय और बच्चों को सुधारने की बजाय तरह-तरह के बहाने बनाते हैं।- विरेंद्र विज, डीसीपी ट्रैफिक
जनवरी से सितंबर 2016 में हुए चालान का ब्यौरा
नाबालिग वाहन चालक : 866
अनाधिकृत व्यक्ति को वाहन चलाने के लिए देना : 756
बिना हेलमेट वाहन चलाना : 95260
दोपहिया वाहन पर तीन सवारी : 8938
दोपहिया वाहन पर बिना हेलमेट के पिछली सवारी : 47888
खतरनाक तरीके से वाहन चलाना : 3369