Kidney Racket: पहले किडनी रैकेट का शिकार हुए फिर चलाने लगे खुद का गिरोह, इन लोगों को बनाते थे निशाना
दक्षिण जिले के एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी पीड़ित को तीन से चार लाख रुपये देते थे। आगे ये किडनी लेने वाले से 25 से 30 लाख रुपये लेते थे। गिरोह में हर किसी का पैसा फिक्स था।
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किडनी रैकेट में गिरफ्तार किए गए आरोपी शैलेष पटेल(23), बिकास उर्फ विकास (24) और रणजीत गुप्ता(43) पहले खुद किडनी रैकेट का शिकार हुए थे। इन लोगों को भी कुछ पैसे का लालच देकर उनकी किडनी निकाल ली गई।
शैलेष पटेल व बिकास की किडनी दिल्ली में निकाली गई थी, जबकि रणजीत की किडनी कोलकाता में निकाली गई थी। इसके बाद ये आरोपी खुद किडनी रैकेट चलाने लगे। ये डोनर को किडनी देने की एवज में 3 से 4 लाख रुपये देते थे और किडनी लेने वाले से ये 25 लाख रुपये से ज्यादा लेते थे। गिरोह में हर किसी का पैसा फिक्स था।
दक्षिण जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तीनों आरोपियों ने जब अपनी किडनी दी तो उन्हें इससे किडनी रैकेट चलाने का आईडिया मिल गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये शेल्टर होम, बस स्टैंड व धार्मिक स्थलों पर रहने वाले गरीब लोगों को निशान बनाते थे। आरोपी शेल्टर होम व बस स्टैंडों पर जाते थे और वहां गरीब लोगों से संपर्क कर उन्हें किडनी देने के लिए तैयार करते थे।
ये पीड़ितों को आलीशान जिंदगी जीने के लिए मोटी रकम देने का लालच देते थे। ये उनका ब्रेनवॉश करके किडनी डोनट करने के लिए तैयार कर लेते थे। इसके अलावा ये सोशल मीडिया के जरिए भी डोनर तक पहुंचते थे।
शैलेष रखता था सोशल मीडिया पर नजर
शैलेष पटेल सोशल मीडिया पर नजर रखता था। फेसबुक पर करीब 20 व्हाट्सएप ग्रुप बने हुए थे। इन ग्रुप में शैलेश सक्रिय रहता था। वह इन ग्रुप पर किडनी देने वाले व किडनी लेने वालों से संपर्क करता था।
दक्षिण जिले के एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी पीड़ित को तीन से चार लाख रुपये देते थे। आगे ये किडनी लेने वाले से 25 से 30 लाख रुपये लेते थे। गिरोह में हर किसी का पैसा फिक्स था।
सभी को कुलदीप राय विश्वाकर्मा उर्फ केडी से तीन से चार लाख रुपये मिलते थे। डॉ. सोनू रोहिल्ला को दो से तीन लाख देते थे। किडनी देने वाले को बेहोश करने वाले डॉ. सौरभ मित्तल को दो लाख रुपये दिए जाते थे। किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान सहायता करने वाले लोगों को 20 से 25 हजार रुपये देते थे।