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Kidnapping Gang Busted: बच्चों को अगवा कर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन महिलाओं समेत आठ आरोपी गिरफ्त में

Sat, 20 Jun 2026 06:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 20 Jun 2026 06:18 AM IST
सार

पुलिस ने गिरोह के कब्जे से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से अगवा किए गए डेढ़ साल के मासूम को सकुशल बरामद कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों को दिल्ली, हरिद्वार, गाजियाबाद, बदायूं और अन्य स्थानों से पकड़ा गया है।

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Kidnapping Gang Busted: eight accused, including three women, arrested
demo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (एनडीआरएस) थाना पुलिस ने बच्चों को अगवा कर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन महिलाओं समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गिरोह के कब्जे से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से अगवा किए गए डेढ़ साल के मासूम को सकुशल बरामद कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों को दिल्ली, हरिद्वार, गाजियाबाद, बदायूं और अन्य स्थानों से पकड़ा गया है।

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रेलवे यूनिट के पुलिस उपायुक्त बी. भरत रेड्डी ने बताया कि गत 25 मई को एक महिला ने अपने डेढ़ वर्षीय बेटे के लापता होने की शिकायत नई दिल्ली रेलवे स्टेशन थाने में दर्ज कराई थी। महिला ने पुलिस को बताया कि वह अपने पति से अलग रह रही है और अक्सर रात में स्टेशन के मुख्य हॉल में ठहरती थी। उसी दौरान किसी ने उसके बेटे का अपहरण कर लिया।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएस थाने में तैनात इंस्पेक्टर याकूब खान और उनकी टीम ने जांच शुरू की। स्टेशन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर तीन संदिग्ध, जिनमें एक महिला भी शामिल थी, बच्चे को ले जाते दिखाई दिए। जांच में सामने आया कि आरोपी पहले ई-रिक्शा से स्टेशन से निकले और फिर अलग-अलग वाहनों के जरिए शास्त्री पार्क होते हुए गाजियाबाद के कासिम विहार पहुंचे।
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पुलिस ने करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया। तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस को जानकारी मिली कि बच्चा हरिद्वार ले जाया गया है। इसके बाद पुलिस टीम हरिद्वार पहुंची और वहां जांच का दायरा बढ़ाया गया।

बदायूं की महिला बेटे की चाहत में बच्चे को खरीदना चाहती थी
पूछताछ में खुलासा हुआ कि बदायूं निवासी आरती नामक महिला बेटे की चाहत में एक बच्चे को खरीदना चाहती थी। उसकी पांच बेटियां हैं और कई प्रयासों के बावजूद उसे कानूनी रूप से बच्चा गोद नहीं मिल पाया था। आरती की बहन पूजा ने उसकी मुलाकात हरिद्वार में रहने वाली प्रीति से कराई। इसके बाद डेढ़ लाख रुपये में बच्चे का सौदा तय हुआ। पुलिस के अनुसार, मांग मिलने पर प्रीति ने अपने सहयोगियों जिया, विशाल और शिवा को बच्चा चोरी करने का निर्देश दिया। आरोपियों ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से मासूम का अपहरण किया और उसे हरिद्वार पहुंचा दिया। वहां से बच्चे को खरीदार तक पहुंचाने की तैयारी चल रही थी। आरती और पूजा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि गिरोह के अन्य छह सदस्यों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने पहले कितने बच्चों की तस्करी की और इसके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।

हरिद्वार में भी बच्चे के अपहरण में शामिल था यही गिरोह
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यही गिरोह हरिद्वार से भी एक अन्य बच्चे के अपहरण में शामिल रहा है। इसके बाद गिरोह की कथित मास्टरमाइंड प्रीति शर्मा, उसके पति धर्मेंद्र और उनके सहयोगी अकील को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने दिल्ली से अगवा किए गए मासूम को सुरक्षित बरामद कर लिया।
 

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नवजात की तस्करी करने वालों से  बच्चे खरीदने वाले जांच के घेरे में

नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त मामले में पुलिस अब उन परिवारों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है, जिन्होंने बच्चे खरीदे थे। आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि पिछले डेढ़ वर्ष में 30 से अधिक नवजात बच्चों का सौदा हुआ। पुलिस खरीदार परिवारों के साथ पूरे नेटवर्क की कुंडली खंगाल रही है। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक 24 ऐसे परिवारों की पहचान की जा चुकी है, जिन्होंने गिरोह से बच्चे खरीदे थे। ये परिवार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में रहते हैं। इन तक पहुंचने के लिए पुलिस ने तीन अतिरिक्त जांच टीमें गठित की हैं। अधिकारियों का कहना है कि रैकेट में कई अन्य लोगों की भी भूमिका सामने आ रही है, जिनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। जांच के तहत शुक्रवार को पुलिस की एक टीम बेगमपुर स्थित डॉ. विवेकी के हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंची। 

यहां से बड़ी मात्रा में दस्तावेज  और अन्य अहम साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पिछले कुछ वर्षों में यहां कितने बच्चों के जन्म दर्ज किए गए और उनके जन्म प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुए। जांच में सामने आया है कि अस्पताल कथित तौर पर नवजात तस्करी के नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बना हुआ था। यहां बच्चों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें खरीदारों को सौंपा जाता था, जिससे बच्चे को खरीदार दंपती की संतान के रूप में दर्शाया जा सके।

पुलिस लगातार प्रतिभा नामक महिला से भी पूछताछ कर रही है, जिसकी भूमिका बच्चों के खरीदार तलाशने में बताई जा रही है। उसने पूछताछ में कुछ अन्य अस्पतालों के नाम भी बताए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

कालिया बच्चों की व्यवस्था करता
अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट के मुख्य सरगना डॉ. विवेकी, साएबा भाई घमर उर्फ कालिया और प्रतिभा हैं। कालिया बच्चों की व्यवस्था करता था, डॉ. विवेकी कथित रूप से दस्तावेज तैयार कराती थीं, जबकि प्रतिभा और उसकी सहयोगी ओमवती खरीदारों से संपर्क साधती थीं। जांच में यह भी पता चला है कि प्रतिभा और ओमवती पहले भी इसी तरह के मामले में जेल जा चुकी हैं। गौरतलब है कि मध्य जिला पुलिस ने हाल ही में कई राज्यों में सक्रिय इस गिरोह का भंडाफोड़ कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें पांच ऐसे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने नवजात बच्चे खरीदे थे। पुलिस ने उनके कब्जे से पांच नवजात बच्चों को भी सुरक्षित बरामद किया था।

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