भारत के वो 5 बड़े हत्याकांड जो आज भी हैं अनसुलझे, हर केस आपको हैरान कर देगा
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मौत से सामना होना किसी भी बुरे सपने से ज्यादा खतरनाक है और चाहे कितना ही मजबूत शख्स क्यों न हो मौत का ख्याल सभी को हिला कर रख देता है। ऐसे में अगर हमारा कोई प्रिय किसी दुर्घटना का शिकार होकर मौत को प्राप्त होता है तो उसकी याद भुला पाना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अगर उनके लिए न्याय मांगने की बात आ जाए और वो न मिले तो इससे ज्यादा बुरा कुछ नहीं हो सकता।
देश में ऐसे ही मौत के कई मामले हैं जिनमें आज तक पता नहीं चल सका कि असली अपराधी आखिर है कौन और इस मामले में न्याय कैसे हो। भारत में भी ऐसे ही 5 मामले में हैं जो आज तक अनसुलझे हैं और आज भी इनकी याद जेहन में आते ही हम सिहर उठते हैं। हमारी इस स्टोरी में पढ़िए ऐसी ही 5 अनसुलझे मामलों के बारे में...
5. सुनंदा पुष्कर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पत्नी और सोशलाइट की रहस्यमयी मौत आज तक सुलझ नहीं सकी है। कहा जाता है कि उसने अपने आप को ऐसे-ऐसे हाई प्रोफाइल स्कैम के जाल में फंसा पाया जिसने उसकी जान ले ली। कई लोग मानते हैं कि वह कुछ तो ऐसा बड़ा राज जानती थी जिससे कई सफेदपोश लोगों के चेहरे से नकाब हट जाता।
सुनंदा एक व्यवसायी भी थीं। वह दुबई की टेकॉम इंवेस्टमेंट कंपनी में सेल्स-मैनेजर थीं और भारत की रेंडेजवस स्पोर्ट्स वर्ल्ड की सह-मालकिन भी थीं। एक दिन सुनंदा के पति और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच एक विवादास्पद ट्विटर बहस हुई। कहा जाता है कि मेहर और शशि थरूर के बीच अफेयर था इसी को लेकर शशि थरूर और मेहर के बीच ट्विटर पर बहस हुई जिसके बाद उसी दिन सुनंदा पुष्कर होटल लीला पैलेस के रूम नंबर 345 में मृत अवस्था में पाई गई थीं। शशि थरूर को उनका शव 17 जनवरी 2014 को मिला था।
शुरुआत में माना गया कि सुनंदा ने आत्महत्या की है। बाद में रिपोर्ट में सामने आया कि सुनंदा की मृत्यु सामान्य नहीं थी। उनके शरीर पर कई चोट के निशान मिले थे। डॉक्टरों का कहना था कि ये चोट उनकी मौत का कारण हो भी सकते हैं और नहीं भी। 1 जुलाई 2014 को जब डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने कहा कि उन पर गलत रिपोर्ट बनाने के लिए दबाव डाला गया था तो इस केस में नया मोड़ आ गया।
10 अक्तूबर 2014 को मेडिकल टीम ने बताया कि उनकी मौत जहर से हुई। 6 जनवरी 2015 को दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सुनंदा की हत्या की गई थी। हालांकि आज भी यह मामला अदालत में चल रहा है तो कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है लेकिन आज तक यह साफ नहीं हो सका है कि सुनंदा की मौत कैसे हुई, अब इसके लिए सबकी निगाहें अदालत के फैसले पर होंगी।
चंद्रशेखर प्रसाद
चंद्रशेखर प्रसाद को कथित तौर पर राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के शार्प शूटरों ने 31 मार्च 1997 को गोलियों से भून दिया था। बिहार के सिवान के एक गरीब परिवार में जन्मे चंद्रशेखर की शुरुआती पढ़ाई झुमरी तलैया के सैनिक स्कूल में हुई। इसके बाद वह भारतीय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में भर्ती हो गए लेकिन जल्द ही इसे छोड़ दिया क्योंकि वह राजनीति में शामिल होना चाहते थे। उन्होंने जेएनयू में दाखिला लेने से पहले पटना विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।
जेएनयू में दाखिला लेने के बाद वह आईसा को व्यवस्थापित करने में लग गए। वह जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर तीन बार लगातार चुने गए। 31 मार्च 1997 को जब वह सिवान में एक भाषण दे रहे थे तब उनकी हत्या कर दी गई। इसके पीछे नेता के रूप में उनकी बढ़ती लोकप्रियता को बताया गया। उनकी मौत से पूरे देश में आक्रोश पनप उठा। अदालत ने इस मामले में दोषी तो करार दिए लेकिन पुलिस आज तक पता नहीं लगा सकी कि इस हत्या की साजिश किसने रची।
3 राजीव दीक्षित
राजीव दीक्षित जो एक सच्चे देशभक्त थे उनकी हत्या का रहस्य आज तक नहीं सुलझ सका है। इस हत्याकांड में कोई जांच, कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई। उनकी मौत की वजह दिल का दौरा था या धीमा जहर, आज तक यह राज ही है।
राजीव दीक्षित एक समाज सेवी थे उनकी मृत्यु 30 नवंबर 2010 को 43 साल की आयु में हुई। वह वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण जैसे मुद्दों की बुराइयों के बारे में बोला करते थे और इसकी आधुनिक समय के उपनिवेशवाद से तुलना करते थे। वह स्वदेशी आंदोलन औ आजादी बचाओ आंदोलन व करों के विकेंद्रीकरण की वकालत करते थे। क्योंकि उनके अनुसार 80 प्रतिशत टैक्स तो राजनेताओं और अफसरशाही को पोषित करते हैं जबकि सिर्फ 20 प्रतिशत जनता के काम आते हैं। इसके साथ ही वह किसानों के अधिकारों की भी बात करते थे।
वह अमेरिका में 2001 में ट्विन टावर पर हुए हमले के बारे में भी बहुत विवादास्पद राय रखते थे। अपनी बात और राय की वजह से उन्होंने अपने बहुत दुश्मन बना लिए थे। उनकी मृत्यु छत्तीसगढ़ के भिलाई में 30 नवंबर 2010 में दिल का दौरा पड़ने से हुई जब वह भारत स्वाभिमान यात्रा के लिए लेक्चर देने जा रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद कोई पोस्टमार्टम नहीं किया गया, जबकि उनका पूरा शरीर काला-नीला पड़ गया था, इससे लगता था कि उन्हें जहर दिया गया हो। यहां तक तमाम मीडिया भी उनकी मौत पर चुप रही, किसी ने उनकी मौत पर कोई रिपोर्ट नहीं की। आज तक किसी को नहीं पता कि उनकी मौत वास्तव में कैसे हुई।
4. लाल बहादुर शास्त्री
एक शख्स जो अपनी मानवता, उदारता, दयालुता के लिए जाना जाता था विदेशी जमीन पर उसकी ऐसी संदिग्ध मौत हुई जो आज भी एक बड़ा राज है।
जैसे राजीव दीक्षित के केस में हुआ ठीक वैसे ही लाल बहादुर शास्त्री की भी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। रूस के ताशकंद में रात के दो बजे थे और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो चुकी थी। इससे पहले वह ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके थे। वह भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिनकी मृत्यु विदेशी जमीन पर हुई। बहुत से लोग मानते हैं कि उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी।
लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद भी कोई पोस्टमार्टम नहीं किया गया इसलिए ऐसा कहा जाता है कि उनकी मौत जहर देने से हुई। इस मामले में कई आरटीआई भी डाली गई लेकिन सरकार की तरफ से इसमें कोई जवाब नहीं दिया और हवाला दिया गया कि यह विदेशी संबंधों का मामला है।
बहुत बाद में ग्रेगोरी काउले नाम के एक पत्रकार ने कंवरसेशन विद क्रो नाम की एक किताब लिखी जिसमें उन्होंने कहा कि शास्त्री की मौत के पीछे सीआईए का हाथ है। क्राउले ने कहा कि अमेरिका भारत के परमाणु नीति से खुश नहीं था और लाल बहादुर शास्त्री न्यूक्लियर टेस्ट करना चाहते थे। किताब में ये भी लिखा है कि भारत-रूस के बढ़ते वर्चस्व से भी अमेरिका परेशान था इसलिए उसने ये साजिश रची। आज भी उनकी मौत का रहस्य बरकरार ही है।
1. अमर सिंह चमकीला
एक निडर पंजाबी विद्रोही जिसे मोटरसाइकिल सवारों के एक गैंग ने दिन दहाड़े मौत के घाट उतार दिया। इनका नाम था अमर सिंह चमकीला। यह संगीत की दुनिया के बादशाह थे और पंजाब में आज तक पैदा हुए कलाकारों में सबसे बेहतर माने जाते हैं। उनकी मौत आज भी एक रहस्य है। अमर गांव की दुनिया के बारे में बात करते थे जैसा उन्होंने देखा था। वह विवाहेत्तर संबंधों के बारे में, शराब के नशे, ड्रग्स के बारे में, गुस्से आदि के बारे में खुलकर बात करते रहते थे। वह हमेशा सच बोलते थे जो उनके चाहने वालों को तो अच्छा लगता था लेकिन उन्हें नापसंद करने वाले उसे अश्लील समझते थे।
उस वक्त जब वह अपने करियर के शिखर पर थे तब अक्सर ही उन्हें खालिस्तानी आतंकियों से हत्या की धमकी मिलती रहती थी। इसका कारण शायद ये रहा हो कि अमर सिंह के गाने बहुत क्रांतिकारी होते थे और उन्होंने शादी भी अमरजोत कौर से कर ली थी जो उनके साथ स्टेज पर प्रस्तुति देती थीं और उनकी जाति की भी नहीं थीं।
जब वह दोनों 8 मार्च 1988 को पंजाब के मेहसामपुर में अपनी प्रस्तुति देने आए थे तो कार से निकलते ही दोनों को गोलियों से भून दिया गया था। उस वक्त अमरजोत गर्भवती थीं और उनकी छाती में गोली मारी गई थी। वहीं अमर सिंह के सीने में चार गोलियां मारकर मौत के घाट उतारा गया था।
इस हादसे का आरोप आतंकियों पर लगाया गया था। कुछ लोग मानते हैं कि अन्य पंजाबी गायकों ने अमर के खिलाफ षड्यंत्र रचा था क्योंकि वह उनसे ज्यादा प्रभावी थे। जब इनकी हत्या की गई तो कर्फ्यू लग गया और गिरोहों के बीच दंगे होने लगे। इतना सब होने के बाद भी इस हत्याकांड में आजतक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है और न ही केस सुलझाया जा सका है।