केरल के छात्र ने दी डीयू दाखिला नीति को चुनौती
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दिल्ली विश्वविद्यालय की दाखिला नीति को एक छात्र ने याचिका दायर कर चुनौती दी है। डीयू की दाखिला नीति के मुताबिक ऐसे बोर्ड जिनकी परीक्षा और अंक पद्धति सीबीएसई से अलग है, उनके छात्रों के बेस्ट फोर के अंकों में से दस फीसदी की कटौती का प्रावधान है।
याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता छात्र तबस्सुम अहमद का कहना है कि केरल स्टेट एजुकेशन बोर्ड से 12वीं कक्षा पास करने और चार विषयों में 100 फीसदी अंक होने बाद भी उसे डीयू में दाखिला नहीं मिला क्योंकि बेस्ट फोर में से दस फीसदी अंक काट लिए गए।
याचिका में कहा गया है कि डीयू के सेंट स्टीफंस कॉलेज के मुताबिक उसके अंक 99.6 फीसदी, हिंदू कॉलेज के मुताबिक 93.3 फीसदी और रामजस कॉलेज के मुताबिक उसके अंक 92.6 फीसदी अंक निर्धारित किए गए।
अंक निर्धारण की नहीं है एकीकृत नीति
छात्र का कहना है कि डीयू के अंक निर्धारण की कोई एकीकृत नीति नहीं है, जिससे दूसरे राज्यों के बोर्ड से परीक्षा पास करने वाले छात्रों में कट ऑफ मार्क के संबंध में भारी भ्रम पैदा होता है।
याची छात्र ने कोर्ट से आग्रह किया है कि दूसरे बोर्ड से आने वाले मेधावी छात्रों को तकनीकी आधार पर दाखिला देने से वंचित नहीं किया जाए।
डीयू की दाखिला नीति के मुताबिक किसी भी विषय में थ्योरी के लिए 70 और प्रैक्टिकल के लिए 30 फीसदी अंक होने चाहिए। जो बोर्ड यह अनुपात नहीं रखते, उनके छात्रों के बेस्ट फोर विषयों में से दस फीसदी अंकों की कटौती की जाती है।