केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी
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दिल्ली में चल रही राजनीतिक तनातनी के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को गुहार लगाई है और उनसे अनुरोध किया है कि दिल्ली में सरकार को आजादी से काम करने में उनकी मदद करें।
केजरीवाल का आरोप है कि दिल्ली के उपराज्यपाल केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं जिसकी वजह से दिल्ली में चुनी हुई सरकार का काम करना मुश्किल हो रहा है।
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने पीएम से इस पूरे मामले को सुलझाने में दिल्ली सरकार की मदद करने की गुजारिश की है। केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा है कि दिल्ली की सरकार को जनता ने चुना है।
जनता की चुनी हुई सरकार को स्वतंत्रता के साथ काम करने का अधिकार होना चाहिए। केजरीवाल की पीड़ा है कि उन्हें और उनकी सरकार के कामकाज में रोड़ा अटकाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से गुजारिश की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और उनकी सरकार को काम करने में उनकी मदद करें।
केजरीवाल का नाम 'झगड़ावाल' होना चाहिए
इस बीच जाने माने इतिहासकार और बीजेपी के नेता एमजे अकबर ने केजरीवाल और जंग के बीच चल रहे विवाद पर कटाक्ष करते हुए कहा है, 'केजरीवाल का नाम अरविंद झगड़वाल होना चाहिए। वह पहले ही इस मामले पर राष्ट्रपति से मिल चुके हैं। राष्ट्रपति ही इसे हल कर सकते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने का कोई मतलब नहीं है।'
इस बीच दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने केजरीवाल से सवाल किया है कि वह विवादों की राजनीति करने आए हैं या शासन करने आए हैं? उपाध्याय ने आरोप लगाया कि केजरीवाल का एजेंडा शासन करना है ही नहीं।
उधर कांग्रेस ने भी केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है और यहां के मुख्यमंत्री को अपने अधिकारों के बारे में जानना चाहिए।
अजय माकन ने कहा कि केजरीवाल को अपना तरीका बदलना चाहिए। उन्हें धरना प्रदर्शन वाली कार्यशैली छोड़ देनी चाहिए क्योंकि अब वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं।
हालांकि इस मौके पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केजरीवाल को अपना रवैया तो बदलना ही चाहिए लेकिन, केंद्र सरकार को भी संयत व्यवहार करना चाहिए।
राज्यपाल ने रद्द किए सभी ट्रांसफर-पोस्टिंग
इस बीच दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच चल रही खींचतान और भी उग्र होती दिख रही है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली के उपराज्यपाल ने पिछले चार दिन में दिल्ली सरकार के किए गए सभी ट्रांसफर और पोस्टिंग को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक एलजी ने सभी सरकारी अधिकारियों को आदेश दिया है कि पहले की तरह वह सारी फाइलें सीधे उन्हें भेजें। यानि दिल्ली के अधिकारियों को किसी भी काम की फाइले संबंधित मंत्रालय के मंत्री को भेजने की जगह एलजी को भेजनी पड़ेंगी।
बता दें कि दिल्ली में कार्यवाहक मुख्य सचिव के पद पर शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति पर 15 मई से सरकार और एलजी के बीच जंग जारी है। इस बीच सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री और एलजी ने राष्ट्रपति से भी मुलाकात की है।
कल ही एलजी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। इस बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह दिल्ली में चल रहे राजनीतिक संकट पर बात करने के लिए आज राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे।