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पानी पर गर्म हुई दिल्ली-हरियाणा की सियासत

Fri, 27 Feb 2015 04:58 PM IST
Updated Fri, 27 Feb 2015 04:58 PM IST
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Kejriwal wrote a letter to Khattar  for Delhi water

दिल्ली-हरियाणा के बीच जल विवाद पर राजनीति गर्मी से पहले फिर गरम होनी शुरू हो गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बुधवार को मुनक कैरियर लाइन चैनल(सीएलसी) में कम किए गए पानी छोड़े जाने की मांग रखी है।

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हरियाणा से पानी पूरा मिलने पर द्वारका, बवाना और ओखला जल शोधन संयंत्र पूरी तरह से चालू हो जाएगा। जलबोर्ड का तर्क है कि इससे पश्चिमी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के कुछ इलाकों की प्यास आसानी से बुझेगी।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने श्री खट्टर जी के सम्बोधन से लिखी गई चिट्ठी में साफ किया है कि मेरी सरकार आपके साथ सहयोग से काम करना चाहती है। यही वजह है कि सीएलसी मामला सुलझाने के लिए पिछले दिनों कुछ कदम भी उठाए हैं।

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पानी देने के लिए केजरीवाल ने की गुजारिश

Kejriwal wrote a letter to Khattar  for Delhi water

केजरीवाल ने लिखा है कि मेरे संज्ञान में यह बात आई है कि हरियाणा सिंचाई विभाग ने कच्चा पानी नहर में छोड़ना कम कर दिया है। इससे दिल्ली के ट्रीटमेंट प्लांट में पीने के पानी का उत्पादन बाधि है।

केजरीवाल ने अपने पत्र में यह भी साफ किया है कि हरियाणा सिंचाई विभाग के अधिकारियों की जानकारी में बार-बार लाए जाने के बावजूद सप्लाई शुरू नहीं की गई है। गर्मी नजदीक है, ऐसे में पानी कम मिलने पर दिल्ली में जल संकट बढ़ जाएगा।

आपसे प्रार्थना है कि मामले को व्यक्तिगत तौर पर तत्कार देखें और संबंधित अधिकारियों को आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दें। अरविंद केजरीवाल ने पत्र के अंत में कहा है कि मैं अधिकारियों के साथ चंडीगढ़ आकर मामले पर चर्चा करना चाहता हूं। आप अपनी सुविधा केअनुसार तारीख और समय बताएं।

इस तरह एमओयू साइन होने के बावजूद अटका रहा मामला

Kejriwal wrote a letter to Khattar  for Delhi water

मुनह नहर को पक्का करने के लिए 1994 में एमओयू साइन हुआ था। नहर 450 करोड़ की लागत से तैयार भी हुआ। इस दौरान पानी के लिए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित 15 साल मामले में लगी रही और मामला नहीं सुलझा। हरियाणा से 95 एमजीडी पानी अतिरिक्त मिलना है।


इस पानी के आने की उम्मीद पर सरकार ने द्वारका, बवाना और ओखला में ट्रीटमेंट प्लांट लगाए थे लेकिन पूरी तरह से ये प्लांट चालू नहीं हो सके हैं। प्लांट के पूरी क्षमता से काम करने पर पश्चिम दिल्ली और दक्षिण दिल्ली में पीने के पानी की दिक्कतें दूर होंगी।

हालांकि दोनो राज्यों में कांग्रेस सरकार होने पर भी मामला नहीं सुलझा था। इसलिए अब आम आदमी पार्टी और भाजपा सरकार केबीच मामला कितनी जल्दी सुलझता है, यह बड़ा सवाल है।

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