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क्यों पलटे केजरीवाल, HC में कहा था 'निजी' है मानहानि केस

Wed, 05 Apr 2017 11:36 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 05 Apr 2017 11:36 AM IST
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kejriwal u turn after lawyer fees dispute, earlier said in high court defamation case is personal
अरविंद केजरीवाल, अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर किए गए मानहानि केस में केजरीवाल के वकील जेठमलानी को दी जाने वाली करोड़ों की फीस पर हुआ विवाद और गहरा सकता है।

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बीजेपी द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने पर मंगलवार को आम आदमी पार्टी की ओर से सफाई दी गई थी कि यह केजरीवाल की निजी लड़ाई नहीं है क्योंकि दिल्ली सरकार की ओर से शहर के क्रिकेट एसोसिएशन में भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ था।
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उसके बाद ही जेटली ने केजरीवाल पर मानहानि का मुकदमा किया था। ज‌िसके वकील राम जेठमलानी नियुक्त किए गए और सरकार पर हुए केस का खर्च दिल्ली सरकार के खजाने से भुगतान करने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन दिल्ली सरकार की यह सफाई ही व‌िवादों में आ सकती है क्योंकि अगर हम थोड़ा पीछे जाकर कोर्ट के दस्तावेजों को देखेंगे तो दस्तावेज कुछ और ही कहते हैं।

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अक्टूबर 2016 में कोर्ट में क‌िया था स्वीकार

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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल ने अरुण जेटली की तरफ से दायर की गई मानहानि की याचिका को 'प्राइवेट इन कैरेक्टर' या निजी बताया था। यहां तक कि दिल्ली के सीएम ने हाईकोर्ट में इस मुकदमे को इसी आधार पर खत्म करने की अपील की थी कि वह निजी है।

उस वक्त जस्टिस पीएस तेजी ने केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था। दरअसल मुख्यमंत्री की वह याचिका मानहानि मामले में ही ट्रायल कोर्ट की तरफ से जारी किए गए समन के खिलाफ थी। इस मामले में कोर्ट ने पिछले 19 अक्टूबर को फैसला सुनाया था

बता दें कि अरुण जेटली ने केजरीवाल पर आपराधिक मानहानि मामले के अलावा दिवानी मुकदमा भी दायर किया है। दिवानी मुकदमे के तहत उन्होंने सीएम से हर्जाने की मांग की है, जबकि आपराधिक मानहानि केस में वह केजरीवाल को सजा दिलाने के लिए लड़ रहे हैं।

कोर्ट ने केजरीवाल के आपराधिक मानहानि मामले पर स्टे देने की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था, 'हालांकि यह सही है कि दोनों में वादी और प्रतिवादी समान हैं, लेकिन तथ्य यही है कि दोनों मामलों की प्रकृति अलग-अलग है। जहां तक दीवानी मुकदमे का सवाल है, उसमें प्रतिवादी संख्या 1 (जेटली) की ओर से अपनी प्रतिष्ठा के नुकसान का हवाला देते हुए हर्जाने की मांग की गई है। वहीं, दूसरा केस आपराधिक मानहानि का है। दोनों केसों पर विचार करने से एक ही अपराध में किसी को दो बार सजा होने का खतरा नहीं है।'

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