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दिल्ली विधानसभा चुनावः त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे केजरीवाल के मंत्री
Fri, 24 Jan 2020 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 24 Jan 2020 05:58 AM IST
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कैलाश गहलोत
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित नजफगढ़ सीट दिल्ली देहात की सबसे हॉट सीट है। बेहद मामूली अंतर से जीत हासिल कर दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत की चुनौती अपने प्रदर्शन को दोहराने की है। जाट बहुल सीट पर उनकी टक्कर भाजपा के अपनी ही बिरादरी के अजीत सिंह से है। वहीं, कांग्रेस ने डीटीसी ट्रेड यूनियन में सक्रिय रहे साहब सिंह पर भरोसा जताया है।
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पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी की लहर होने के बावजूद कैलाश गहलोत सिर्फ 1555 वोटों से जीते थे। भारतीय राष्ट्रीय लोकदल (आईएनएलडी) के दिल्ली से चेहरा रहे भरत सिंह ने कड़ी टक्कर दी थी। भरत सिंह के निधन होने के बाद इस बार न तो आईएनएलडी और न ही उससे अलग होकर बनी जेजेपी मैदान में है। ऐसे में सजातीय प्रत्याशी होने से भाजपा की दावेदारी भी मजबूत है। वहीं, कांग्रेस की नजर यादव वोटों पर है, जो बतौर वोटर तीसरा बड़ा जातीय समूह है।
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कैलाश गहलोत
मजबूती :
-बतौर परिवहन मंत्री इलाके की बस की संख्या बढ़ाई है।
-जाट बहुल सीट के जाट प्रत्याशी।
-कानून की डिग्री होने से प्रोफेशनल के बीच पकड़ मजबूत।
कमजोरी :
-मिलनसार नहीं होने से आम मतदाताओं से दिली जुड़ाव नहीं।
-कार्यकर्ताओं से भी नहीं है सीधा संपर्क।
-दिल्ली देहात के ठेठ ग्रामीण परिवेश से कटाव।
भाजपा : अजित सिंह
मजबूती :
-पिछला चुनाव हारने के बावजूद पांच साल से सक्रिय होने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में पकड़ मजबूत।
-जाट बहुत सीट से जाट प्रत्याशी।
-हरियाणा से सटी सीट होने के कारण जेजेपी से गठबंधन का मिल सकता है फायदा।
कमजोरी :
-एक ही समुदाय के दो प्रत्याशी।
-लगातार दो बार की हार से कार्यकर्ता निरुत्साहित।
-तकनीक से दूरी होने से युवाओं को जोड़ना चुनौती।
कांग्रेस : साहब सिंह
मजबूती :
-यादव मतदाताओं में मजबूत पकड़।
-इलाके में लगातार सक्रिय रहे हैं।
-डीटीसी ट्रेड यूनियन से जुड़े होने से नौकरीपेशा वर्ग में पहचान।
कमजोरी :
-पुराने कांग्रेसी नहीं होने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में पकड़ नहीं।
-जातिगत खांचे में फिट नहीं हैं।
-तकनीक से दूर होने से युवाओं से जुड़ने के विकल्प सीमित।
जातीय समीकरण (फीसदी में)
जाट : 48
वाल्मीकि व जाटव : 15
यादव : 12
ब्राह्मण : 10
पंजाबी : 5
मुस्लिम : 3
अन्य : 7