पंजाब के लिए केजरीवाल छोड़ सकते हैं CM की कुर्सी
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पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी को सफलता दिलाने के लिए और पूरी ताकत झोंक देने के लिए केजरीवाल दिल्ली सीएम पद छोड़ सकते हैं। केजरीवाल की अनुपस्थिति में उनकी जिम्मेदारी डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया निभाएंगे।
अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के अनुसार 2017 में होने वाले पंजाब चुनाव में आप के जीतने की बड़ी संभावना है। दरअसल आप का एक बड़ा वर्ग ये महसूस करता है कि अगर वो केजरीवाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ें तो उनके जीतने की बड़ी संभावना है।
बता दें कि केजरीवाल दिल्ली के सीएम तो हैं लेकिन उनके अधीन कोई मंत्रालय नहीं है। यही नहीं वो देश के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिसके पास कोई मंत्रालय नहीं है। वहीं वित्त, शिक्षा, प्लानिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट जैसे सभी मुख्य मंत्रालय मनीष सिसोदिया के पास हैं।
केजरीवाल के लिए चुनाव क्षेत्र भी ढूंढा जा रहा है
केजरीवाल के पद छोड़कर दिल्ली से बाहर की राजनीति में कदम रखने के कयास तो तभी से लग रहे हैं जब से उन्होंने अपने पास कोई मंत्रालय नहीं रखने का निर्णय लिया था। माना जा रहा है कि वो सिसोदिया को सारा कार्यभार सौंपकर पंजाब चुनाव में कूद जाएंगे।
आप के पंजाब सूत्रों की माने तो केजरीवाल के लिए चुनाव क्षेत्र ढूंढने का काम पहले ही शुरू हो चुका है। केजरीवाल चुनाव से पहले पंजाब में अपनी पहली रैली 14 जनवरी को कर सकते हैं। केजरीवाल के पंजाब चुनाव में कूदने की महत्वाकांक्षा को बिहार चुनाव के नतीजों ने बल दिया है।
केजरीवाल का मानना है कि जिस तरह से बिहार में बीजेपी की बुरी हार हुई है वो नरेंद्र मोदी के ग्राफ गिरने की शुरूआत है। सूत्रों का मानना है कि अगर पंजाब में आप की शानदार जीत होती है तो केजरीवाल बीजेपी और कांग्रेस विरोधी एक मुख्य तत्व बन जाएंगे।
आप की है कांग्रेस से टक्कर
सूत्रों के अनुसार केजरीवाल ने अपनी इस योजनाक के बारे में नीतीश कुमार और ममता बनर्जी को भी बताया है और उन्होंने सहमति जताते हुए केजरीवाल से एक प्रयास जरूर करने को कहा है। एक आप नेता का कहना है कि अगर वो पंजाब में फेल भी हो जाते हैं तो वो वापस दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में वापस जा सकते हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली से बाहर पंजाब में आप का अच्छा बेस है। संसद में आप के सभी चार सांसद पंजाब से ही हैं और आप के नेताओं को भी ये लगता है कि पंजाब की वर्तमान सरकार से लोग खुश नहीं हैं।
पंजाब के आप नेताओं का मानना है कि पंजाब में उसकी कड़ी टक्कर कांग्रेस से है ना कि शासन कर रही पार्टी शिरोमणि अकालीदल से। उन्हें लगता है कि अगर केजरीवाल को मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जाए तो पार्टी के जीतने के चांस बढ़ जाएंगे। जबकि कांग्रेस अरुण जेटली को हराने वाले अमरिंदर सिंह को अपने चेहरे के रूप में पेश करने वाली है।