बच्ची की मौत पर गरमाई सियासत, केंद्र व दिल्ली सरकार में ठनी
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एनसीआर समेत उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में शीतलहर चल रही है। इस बीच में शकूरबस्ती की सीमेंट साइट पर बनी करीब 500 झुग्गी शनिवार रात तोड़ी गई।
ठंड में परिवार खुले आसमान के नीचे आए तो दिल्ली की राजनीति देर रात गर्माने लगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, गृहमंत्री सत्येंद्र जैन शनिवार आधी रात घटनास्थल पर पहुंचे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन रविवार को सुबह और शाम को घटनास्थल पर पहुंचे। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी महिलाओं का हाल देखने पहुंचीं।
मुख्यमंत्री ने रेलवे और पुलिस को असंवेदनशील बताया, दो एसडीएम समेत तीन अधिकारी निलंबित कर दिए। सत्येंद्र जैन ने दो झुग्गी तोड़ने की जानकारी पर 500 झुग्गी तोड़ने का आरोप लगाया।
'छह घंटे सोते रहे केजरीवाल'
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने कहा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल छह घंटे सोते रहे। जब कार्रवाई हुई तो क्यों नहीं पहुंचे? तोड़फोड़ शनिवार दोपहर को हुई, वह रात 12 बजे पहुंचे।
मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, आम आदमी पार्टी के नेता, कांग्रेस ट्वीटर वार में भी जुट गए। रात को शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप रविवार दिनभर चलता रहा। मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से मुलाकात का समय भी मांगा, ताकि पूरे मामले में सरकार का पक्ष और बेघर लोगों का दर्द रख सकें।
रेलवे का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा है और कानून के खिलाफ है। रेलवे ने स्पष्टीकरण दिया तो दिल्ली सरकार ने दिल्ली आश्रय सुधार बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सरकार का पक्ष रखने केलिए सामने किया है।
रेलवे ने कहा सरकार को झुग्गियों के पुनर्वास का पैसा दे चुके हैं। सीईओ डुसिब वीके जैन ने कहा कि 2003 में 3 हजार झुग्गी हटाने केलिए 11.25 करोड़ रुपये दिए थे, जो अब 12 हजार झुग्गी हो गई है।
'अतिक्रमण हटाने से मौत का ताल्लुक नहीं'
मंडल रेल प्रबंधक अरुण अरोड़ा ने कहा कि घटना का अतिक्रमण हटाओ मुहिम से कोई सरोकार नहीं है। रेलवे की मुहिम दोपहर 12 बजे से शुरू हुई।
जबकि बच्ची की मौत की सूचना साढ़े दस बजे आ गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि मुहिम से पहले झुग्गी वालों को तीन बार नोटिस दिया जा चुका था। इसके बावजूद वे हटने को तैयार नहीं थे।
सीएम केजरीवाल के मुताबिक घटनास्थल पर हृदय विदारक दृश्य था। अपने ही लोग गरीब साथियों के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? राहत नहीं दिए जाने पर एसडीएम और एसई को निलंबित कर दिया है। खाना और कंबल उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। दिल्ली में कुछ अमीरों और राजनीतिज्ञों की प्रॉपर्टी तोड़ने के आदेश कोर्ट के हैं, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।