उपराज्यपाल पर केजरीवाल सरकार का पलटवार, समन भेजने की तैयारी
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दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष और पेटिशन कमेटी की अध्यक्ष राखी बिडलान ने कहा है कि दो एमएलए की तरफ से भेजी गई शिकायत विस अध्यक्ष की तरफ से मिली है। शिकायत में कृष्णा गोदावरी बेसिन केस में आप सरकार के 49 दिन के कार्यकाल में मुकेश अंबानी के खिलाफ दर्ज एफआईआर मामले और शीला दीक्षित पर दर्ज 4 एफआईआर में कार्रवाई नहीं किए जाने पर उपराज्यपाल और एसीबी चीफ पर लापरवाही का आरोप है। इसमें पेटिशन कमेटी बृहस्पतिवार को बैठक कर रही है, जिसमें उपराज्यपाल को समन भेजने पर चर्चा होगी।
पेटिशन कमेटी की उपाध्यक्ष राखी बिडलान का कहना है कि कमेटी के पास किसी को भी समन भेजने का अधिकार है। दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल से इस मामले में राय मांग ली है। समिति अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके उपराज्यपाल समेत जिसे भी जरूरत होगी, उसे समन भेजेगी।
शिकायत गंभीर है। बृहस्पतिवार को 3 बजे इस मामले में कमेटी की बैठक है। विधान सभा अध्यक्ष राम निवास गोयल का कहना है कि विधायक राजेंद्र पाल गौतम और सोमनाथ भारती की तरफ से नागरिक की शिकायत के साथ पत्र मिला था। शिकायत में गंभीरता दिखी, जिसे पेटिशन कमेटी को सौंप दी।
केजरीवाल अपना आपा खो बैठे हैं
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता का टैंकर घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधने का सिलसिला जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार में भी दिल्ली जल बोर्ड टैंकर घोटाला जारी रहने में फंसने के बाद मुख्यमंत्री अनाप शनाप बोलकर जांच को प्रभावित करना चाहते हैं। अपने ऊपर दर्ज एफआईआर को झूठा कहकर वे जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि जनता मुख्यमंत्री की असलियत जान गई है। भ्रष्टाचार खत्म करने की नीति अपनाने की बात कहने वाले अरविंद केजरीवाल जल बोर्ड के टैंकर घोटाले को अपनी सरकार आने के बाद भी संरक्षण देते रहे। उन्होंने कहा कि यह घोटाला उजागर होने और एफआईआर होने के बाद अरविंद केजरीवाल अपना आपा खो बैठे हैं। दिल्ली के जल मंत्री बनने के बाद कपिल मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में हुए टैंकर घोटाले के तथ्यों की पड़ताल कर सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए समिति गठित की, जिसने 14 जुलाई 2015 को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
गुप्ता का कहना है कि कपिल मिश्रा ने 28 अगस्त 2015 को घोटालेबाजों को दंडित कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। मगर अरविंद केजरीवाल ने इतने बड़े घोटाले को 11 माह तक दबाए रखा और उनके कार्यकाल में भी कंपनियों का ठेका जारी रहा। इससे साबित हो गया है कि टैंकर घोटाले की जितनी दोषी शीला दीक्षित हैं उतने ही दोषी अरविंद केजरीवाल भी हैं।