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कोरोना को लेकर विपक्ष के निशाने पर आए केजरीवाल, जुलाई-अगस्त तक दिल्ली में संक्रमण शिखर पर!

Mon, 08 Jun 2020 08:22 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 08 Jun 2020 08:22 PM IST
सार

  • कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम ने साधा निशाना
  • उपराज्यपाल बैजल ने भी पलटा केजरीवाल का आदेश
  • खुद हुए क्वारंटीन, मंगलवार को होगी जांच
  • दिल्ली के स्वास्थ्यमंत्री सत्येंद्र जैन ने भी डराया

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Kejriwal came under attack from the opposition for the Corona infection, in July-August at the infection could be on peak in Delhi
अरविंद केजरीवाल - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कोविड-19 संक्रमण से निबटने के उपायों में फेल होने का राजनीतिक दबाव बढ़ने लगा है। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने भी दिल्ली कैबिनेट से मंजूर मुख्यमंत्री के आदेश को भी पलट दिया है।


दिल्ली सरकार ने सात जून को कहा था कि दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पतालों में केवल दिल्लीवासी ही कोविड-19 संक्रमण की जांच, इलाज करा सकेंगे। विशेष सर्जरी आदि जैसे मामलों दिल्ली सरकार ने इसमें छूट दी थी।

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उपराज्यपाल ने इसे रद्द करके पुरानी व्यवस्था लागू कर दी है। इस बीच पूर्व केंद्रीय गृह, वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी जोरदार चुटकी ली है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कोविड-19 से संक्रमित होने की आशंका है। गले में खराश, बुखार की शिकायत के बाद उन्होंने खुद को क्वारंटीन करने का फैसला किया है। मंगलवार 9 जून को अरविंद केजरीवाल का सैंपल लेकर संक्रमण के बाबत जांच की जाएगी।

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चिदंबरम के सवाल से कनेक्ट हो रही है दिल्ली की जनता

पी .चिदंबरम ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि मिस्टर केजरीवाल बताएं, दिल्लीवासी हैं कौन? आयकर विभाग के पूर्व अधिकारी धनेश कपूर का कहना है कि दिल्ली सरकार का यह आदेश ही गलत है।


चिदंबरम यहां सही सवाल उठा रहे हैं। कपूर का कहना है कि दिल्ली में देशभर के प्रदेशों के लोग रहते हैं। तमाम कामगार भी हैं, उनके पास अभी दिल्ली का राशन कार्ड या एड्रेस प्रूफ नहीं हैं।

दिल्ली के तमाम लोग राजधानी से सटे इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा गाजियाबाद तथा नोएडा में रहते हैं। तमाम लोग कुछ महीने पहले दिल्ली में ही रहते थे।

कपूर का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में इस तरह का प्रतिबंध सही नहीं है। पूर्व पुलिस अधिकारी एके सिंह का भी कहना है कि ऐसे राजनीतिक फैसले नहीं लिए जाने चाहिए।

हालांकि जगदंबा सिंह, विनोद कुमार और संदीप मलिक जैसे लोगों का कहना है कि केजरीवाल का कदम सही है। आखिर जब दूसरे राज्य के लोग अस्पतालों में भर जाएंगे, तो यहां की जनता कहां जाएगी?

सत्येन्द्र जैन ने कहा दो सप्ताह में 56 हजार कोविड संक्रमित

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्यमंत्री सत्येन्द्र जैन ने आशंका जाहिर की है कि दो सप्ताह के भीतर दिल्ली में कोविड-19 संक्रमितों का आंकड़ा 56 हजार तक पहुंच सकता है।

सत्येन्द्र जैन का यह बयान आठ जून को आया है। जबकि आठ जून से ही दिल्ली समेत देश के लगभग राज्यों में मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर समेत तमाम संस्थान, हेयर ड्रेसर की दुकान आदि खुल चुकी हैं।

दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय के एक अधिकारी ने कहा कि अब तो लॉकडाउन रहा नहीं, इसलिए मामले तेजी से बढ़ेंगे। सूत्र का कहना है कि कोविड-19 का परीक्षण भी ज्यादा हो रहा है, इसलिए मामले तेजी से जानकारी में आ रहे हैं।

हालांकि जांच, अस्पताल में व्यवस्था, बेड की उपलब्धता पर सूत्र का कहना है कि दिल्ली सरकार इसके लिए तत्पर है। तेजी से उपाय किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य निदेशालय के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दिल्ली में जुलाई, अगस्त का महीना कोविड-19 के संक्रमण का पीक हो सकता है।

जुलाई में दिल्ली में संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख तक हो सकती है।

क्यों लिया था केजरीवाल ने केवल दिल्लीवासियों के इलाज का फैसला?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन का कहना है कि दिल्ली सरकार के दावों की पोल खुल गई। लोग अस्पतालों में इलाज और जांच के लिए भटक रहे हैं।

कांग्रेस नेता का कहना है कि कुछ दिन पहले केजरीवाल कोविड-19 संक्रमण से चार कदम आगे चलने का दावा कर रहे थे। आज अचानक उन्हें इस तरह सरेंडर करने की नौबत क्यों आ गई? 



कांग्रेस नेता राजेश लिलोठिया इसे दिल्ली सरकार का जनता को भ्रम में रखने का प्रयास बताते हैं। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के वालेंटियर राजेश चौधरी का कहना है कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर और यहां तक कि मेरठ तक से लोग आते हैं, इलाज कराते हैं।

इसी तरह से हरियाणा के कई जिले के लोग दिल्ली में इलाज करा रहे हैं। ऐसे में दिल्ली पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कुछ राज्यों के संक्रमितों का बोझ बढ़ रहा है।

राजेश चौधरी का कहना है कि इसके कारण दिल्ली के संक्रमितों की न तो जांच हो पा रही है और न हीं उन्हें अस्पताल में बेड मिल पा रहे हैं।

आने वाले समय इस खतरे के बढ़ने की संभावना को देखकर ही दिल्ली सरकार ने नई व्यवस्था दी थी।

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