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Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नेताओं को सामान्य नागरिकों की तुलना में विशेषाधिकार नहीं, ईडी की दलील दरकिनार

Sat, 11 May 2024 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 11 May 2024 05:10 AM IST
सार

विलक्षण महत्व को देखते हुए हम अभियोजन पक्ष की ओर से उठाए इस तर्क को खारिज करते हैं कि इस आधार पर अंतरिम जमानत देने से नेताओं को इस देश के सामान्य नागरिकों की तुलना में विशेषाधिकार मिलेगा। 

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Kejriwal Bail: Supreme Court said- leaders do not have privileges compared to ordinary citizens
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि आम चुनाव लोकतंत्र को जीवन शक्ति देते हैं। विलक्षण महत्व को देखते हुए हम अभियोजन पक्ष की ओर से उठाए इस तर्क को खारिज करते हैं कि इस आधार पर अंतरिम जमानत देने से नेताओं को इस देश के सामान्य नागरिकों की तुलना में विशेषाधिकार मिलेगा। 

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जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ अंतरिम जमानत या रिहाई देने के सवाल की जांच करते समय अदालतें हमेशा संबंधित व्यक्ति से जुड़ी विशिष्टताओं और आसपास की परिस्थितियों को ध्यान में रखती हैं। उसकी उपेक्षा करना अधर्म एवं गलत होगा।
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कोर्ट ने फैसले में कहा, मौजूदा मामले की स्थिति की तुलना फसलों की कटाई या व्यावसायिक मामलों की देखभाल की दलील से नहीं की जा सकती। दरअसल, ईडी की ओर से तर्क
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दिया गया था कि अगर प्रचार करने के लिए राजनेताओं को अंतरिम जमानत दी गई तो किसान फसलों की कटाई या व्यापारी अपने व्यापार को लेकर अंतरिम जमानत मांग सकते हैं। ईडी ने कहा था कि चुनाव के लिए प्रचार करना न तो मौलिक अधिकार है और न ही सांविधानिक। यह कानूनी अधिकार भी नहीं है।

यह मामला कोई अपवाद नहीं

  • पीठ ने फैसले में अंतरिम जमानत या रिहाई देने की शक्ति को लेकर कुछ मामलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा, मुकेश किशनपुरिया बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में, इस न्यायालय ने माना है कि नियमित जमानत देने की शक्ति में अंतरिम जमानत देने की शक्ति भी शामिल है, विशेष रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के मद्देनजर। अंतरिम जमानत देने की शक्ति का प्रयोग आमतौर पर कई मामलों में किया जाता है। प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर अंतरिम जमानत दी जाती है। यह मामला कोई अपवाद नहीं है।

केजरीवाल समाज  के लिए खतरा नहीं
यह सही है कि केजरीवाल 9 समन के बावजूद ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए, जिनमें से पहला समन अक्तूबर, 2023 में जारी किया गया था। यह एक नकारात्मक कारक है, पर कई अन्य पहलू हैं जिस पर हमें विचार करना जरूरी है। केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री और एक राष्ट्रीय दल के नेता हैं। निस्संदेह, उनपर लगे आरोप गंभीर हैं लेकिन उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह समाज के लिए खतरा नहीं हैं। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि गिरफ्तारी की वैधानिकता का परीक्षण स्वयं यह कोर्ट कर रहा है और हमें अभी भी इस पर अंतिम निर्णय देना बाकी है।
-पीठ

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