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केजरीवाल का शाह पर हमला: 'भ्रष्ट नेताओं को पार्टी में लेने वाले भी दें इस्तीफा, आज आप सरकार को याद कर रहे लोग'

Mon, 25 Aug 2025 05:02 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 25 Aug 2025 05:02 PM IST
सार

केजरीवाल ने आगे सवाल किया कि अगर किसी को झूठे केस में जेल भेजा जाता है और बाद में वह निर्दोष साबित होता है, तो झूठा केस बनाने वाले मंत्री को कितने साल की सजा मिलनी चाहिए?

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Kejriwal attack on amit Shah Should those who induct corrupt leaders in their parties also resign
अरविंद केजरीवाल और अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। शाह ने हाल ही में कहा था कि जिन नेताओं पर गंभीर अपराधों के मामले चल रहे हों और जो 30 दिन से ज्यादा जेल में रहें, उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

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केजरीवाल का सवाल
शाह के बयान पर पलटवार करते हुए केजरीवाल ने एक्स पर लिखा कि अगर कोई नेता गंभीर अपराधों के दोषी लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करता है, उनके केस खत्म कराता है और उन्हें मंत्री, डिप्टी सीएम या सीएम बनाता है, तो क्या ऐसे नेता को भी इस्तीफा नहीं देना चाहिए? उन्होंने पूछा कि ऐसे नेताओं को कितने साल की सजा होनी चाहिए?

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झूठे केस पर टिप्पणी
केजरीवाल ने आगे सवाल किया कि अगर किसी को झूठे केस में जेल भेजा जाता है और बाद में वह निर्दोष साबित होता है, तो झूठा केस बनाने वाले मंत्री को कितने साल की सजा मिलनी चाहिए?
 
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जेल से सरकार चलाने का जिक्र
केजरीवाल ने अपने एक और पोस्ट में कहा कि जब केंद्र सरकार ने राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें झूठे केस में फंसाकर जेल भेजा, तब उन्होंने 160 दिन तक जेल से ही दिल्ली की सरकार चलाई। 
 

'जेल सरकार से बेहतर काम हुआ'
उन्होंने कहा कि बीते सात महीनों में बीजेपी सरकार की वजह से दिल्ली की हालत खराब हो गई है। लोग अब उस सरकार को याद कर रहे हैं, जो जेल से चल रही थी। उस समय न बिजली कटती थी, न पानी की कमी थी, अस्पतालों और मोहल्ला क्लीनिकों में मुफ्त दवाइयां और टेस्ट मिलते थे। बारिश से शहर में अफरातफरी नहीं मचती थी और प्राइवेट स्कूल मनमानी नहीं करते थे।

विवादों में नया विधेयक
बता दें कि केंद्र सरकार ने मानसून सत्र में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया है। विपक्ष का आरोप है कि इस कानून के जरिए राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जाएगा।
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