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दिल्ली में लागू होने वाला है नया कानून
अखिलेश कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 17 Jan 2014 03:55 PM IST
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दिल्ली में अब आधा दर्जन से ज्यादा लोकायुक्त होंगे। इनकी अगुवाई मुख्य लोकायुक्त करेंगे। मुख्य लोकायुक्त व लोकायुक्तों के चयन के लिए सर्च कमेटी नाम भेजेगी।
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सर्च कमेटी से मिले नाम में से अंतिम निर्णय छह सदस्यीय लोकायुक्त चयन समिति करेगी। जिसमें मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और नेता प्रतिपक्ष शामिल होंगे। नए लोकायुक्त को शक्ति संपन्न बनाया जा रहा है। नया कानून बनने पर पुराना लोकायुक्त कानून खुद हट जाएगा।
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दिल्ली के नए लोकायुक्त कानून का ड्राफ्ट करीब-करीब तैयार है। इसे शुक्रवार को मुख्यमंत्री को सौंपा जा सकता है। इस पर छह सदस्यीय समिति की कई बैठकें हो चुकी हैं। समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव एसके श्रीवास्तव ने ड्राफ्ट पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से चर्चा की।
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अहम है कि सीएम केजरीवाल ने घोषणा कर रखी है कि फरवरी के पहले सप्ताह में रामलीला मैदान में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर नए लोकायुक्त कानून को पास किया जाएगा।
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सूत्रों के अनुसार नए लोकायुक्त को अधिकार संपन्न बनाने की कोशिश होगी। पुराने लोकायुक्त की तरह सिर्फ सिफारिश का अधिकार नहीं होगा बल्कि नेता, नौकरशाह, सरकार से किसी तरह की सहायता लेने वाली संस्था पर जुर्माना, आपराधिक मुकदमा दर्ज करके सीधे सेशन कोर्ट में भेज सकेंगे। इतना ही नहीं नौकरशाह या अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला सिद्ध हो जाता है तो नौकरी से बर्खास्त करने का अधिकार भी नए लोकायुक्त को देने की तैयारी है।
दिल्ली सरकार के सूत्र बताते हैं कि नए ड्राफ्ट के अनुसार जो भी एजेंसी सरकारी पैसा किसी रूप में लेती है, उसे पब्लिक अथॉरिटी बनाना होगी। उसके तहत एक सिटीजन चार्टर बनाकर समयबद्ध काम बताना होगा। एक अधिकारी व अपील अधिकारी नियुक्त करना होगा। अगर समय पर काम नहीं करते हैं तो लोकायुक्त के पास नागरिक शिकायत कर सकेंगे। लोकायुक्त सुनवाई करके जुर्माना कर सकेगा।
उल्लेखनीय हे कि अभी जो लोकायुक्त कानून दिल्ली में लागू हैं उसमें सिर्फ एक लोकायुक्त होते हैं। वह पद भी जस्टिस मनमोहन सरीन के रिटायर होने के बाद से खाली पड़ा है। इन्हें सिर्फ चुने हुए प्रतिनिधियों के खिलाफ शिकायत सुनकर सिफारिश करने का अधिकार है।
क्या रहेगी कानून बनने की प्रक्रिया
दिल्ली का नया लोकायुक्त कानून बनाए जाने के लिए सबसे पहले ड्राफ्ट तैयार होगा। उससे बिल का अंतिम रूप देकर कैबिनेट से पास कराना होगा। कैबिनेट जब पास कर देगी तो फिर गृह मंत्रालय की स्वीकृति लेनी होगी। गृह मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद विधान सभा में सरकार को यह बिल पास कराना होगा। विधानसभा में बिल पास होने पर फिर उपराज्यपाल के माध्यम से गृह मंत्रालय को भेजकर राष्ट्रपति से मुहर लगवानी होगी। कानून बनने पर लोकायुक्त व मुख्य लोकायुक्त की चयन प्रक्रिया शुरू होगी।