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Kashmir Attack: सत्यापन शुरू होते ही पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों में बेचैनी, जानकारी के अभाव में हो रहे हलकान

Sun, 27 Apr 2025 06:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 27 Apr 2025 06:18 AM IST
सार

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी हिंदू नागरिकों को दिया गया लंबी अवधि का वीजा (एलटीवी) वैध रहेगा, लेकिन अपर्याप्त जानकारी के कारण शरणार्थियों में अनिश्चितता बनी हुई है।

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Kashmir Attack: Uneasiness among Hindu refugees coming from Pakistan as verification has started
मजनू का टीला स्थित हिंदू शरणार्थी कैंप .... file - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तरी दिल्ली के मजनू का टीला में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी अपनी स्थिति को लेकर चिंतित हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी हिंदू नागरिकों को दिया गया लंबी अवधि का वीजा (एलटीवी) वैध रहेगा, लेकिन अपर्याप्त जानकारी के कारण शरणार्थियों में अनिश्चितता बनी हुई है।

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दिल्ली पुलिस ने हाल ही में सत्यापन अभियान शुरू किया है। सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी अवैध रूप से न रहे या जाली दस्तावेजों का उपयोग न कर रहा हो। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में किसी को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। यह कदम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बाद उठाया गया है।
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मजनूं का टीला में हिंदू शरणार्थी समुदाय के अध्यक्ष सोना दास ने बताया कि कई परिवार वर्षों से दिल्ली में रह रहे हैं और समय-समय पर दस्तावेज सत्यापन के बाद अपने वीजा नवीनीकृत कराते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ परिवार एक-दो महीने पहले ही पाकिस्तान से आए हैं और मजनू का टीला के पास शिविरों या सिग्नेचर ब्रिज के नीचे शरण लिए हुए हैं।
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दूसरे समूह के नेता दयाल दास ने बताया कि पुलिस ने हाल ही में उनसे संपर्क कर नागरिकता प्राप्त करने वालों, आवेदन लंबित वालों और नए आए परिवारों का विवरण मांगा। उन्होंने कहा पिछले दो महीनों में 10-12 नए परिवार पाकिस्तान से यहां आए हैं।

शरणार्थी शिविर के निवासी कृष्ण लाल ने चिंता जताई कि उनकी पत्नी, बच्चों और भाई के नागरिकता आवेदन अभी लंबित हैं। उन्होंने कहा मुझे नहीं पता कि उनके वीजा रद्द होंगे या उन्हें रहने की अनुमति मिलेगी। मजनू का टीला में चाय की दुकान चलाने वाले कन्हैया ने कहा पाकिस्तान में हमारे लिए कोई नहीं बचा। अगर हमें दिल्ली छोड़ने के लिए कहा गया तो हमारे पास जाने की कोई जगह नहीं होगी।

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दो बच्चों की मां रेनू ने बताया कि उनके बच्चे हाल ही में पास के स्कूल में पढ़ाई शुरू कर चुके हैं। उन्होंने कहा जब कुछ लोगों को नागरिकता मिली तो हमें उम्मीद जगी थी। लेकिन अब दस्तावेजों की जांच के कारण हमें डर है कि कहीं हमें वापस न भेज दिया जाए।
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