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करवा चौथ विशेष: पति की लंबी उम्र की कामना पर घर में ही हिंसा का सामना, हर दिन 1173 महिलाएं झेल रहीं दर्द

Tue, 31 Oct 2023 04:45 AM IST
विजय पुंडीर आयुशी ध्यानी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आयुशी ध्यानी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 31 Oct 2023 04:45 AM IST
सार

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। इसमें साल दर साल इजाफा भी हो रहा है। हर दिन करीब 1,173 महिलाएं हिंसा का शिकार हो रही हैं। इसमें बड़ी संख्या में पति भी शामिल हैं और उसके परिजन भी।

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karwa chauth special Women are continuously becoming victims of domestic violence
करवा चौथ पर दिल्ली के पहाड़ गंज की नेहरू मार्किट में खरीदारी करती महिलायें - फोटो : भूपिंदर सिंह

विस्तार

पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं बेशक हर साल करवाचौथ का व्रत रखती हैं, लेकिन सबसे ज्यादा हिंसा का शिकार भी वह अपनों से ही होती हैं। काफी संख्या में पति और उसके परिवार का सलूक घर की बहू के लिए ठीक नहीं रहता। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी), दिल्ली महिला आयोग समेत महिला संगठनों की रिपोर्ट्स इसकी तस्दीक भी करती हैं। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। इसमें साल दर साल इजाफा भी हो रहा है। हर दिन करीब 1,173 महिलाएं हिंसा का शिकार हो रही हैं। इसमें बड़ी संख्या में पति भी शामिल हैं और उसके परिजन भी।

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एनसीआरबी की नवीनतम 2021 की रिपोर्ट बताती है कि महानगरों में सबसे ज्यादा हिंसा दिल्ली में होती है, जबकि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व बिहार में भी महिलाएं हासिये पर हैं। दूसरे राज्यों की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। पूरे देश में 4,28,278 मामले महिलाओं के खिलाफ हिंसा के दर्ज हुए हैं। आंकड़ो में मामूली बदलाव के साथ इसमें शारीरिक, मानसिक से लेकर लैंगिक हिंसा तक शामिल हैं। यहां तक कि बुजुर्ग, नाबालिग और गर्भवती महिलाएं भी कई बार सुरक्षित नहीं रहती हैं।

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विशेषज्ञों की राय
दुख की बात यह है कि बहुत सी काबिलियत होने के बावजूद वह अपने घरों में सुरक्षित नहीं हैं। दिल्ली में आठ महीने की बच्ची से लेकर 80 साल की बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म होता है। आयोग की हेल्पलाइन नंबर पर भी सबसे ज्यादा शिकायतें घरेलू हिंसा की आती हैं। हर रोज मेरे पास इससे जुड़े मामले आते हैं। कभी पति पीटता है, कभी सास-ससुर या परिवार वाले। हिंसा करने वाले ज्यादातर लोग नशे में होते हैं। -स्वाति मालीवाल, अध्यक्ष, दिल्ली महिला आयोग

हर रोज महिलाएं घरेलू हिंसा से परेशान होकर उनके पास आती हैं। उन पर बेटे को जन्म देने के लिए दबाव बनाया जाता है। पति भी शराब के नशे में मारता है। यहां तक कि महिलाओं की इतनी बुरी हालत हो जाती है कि उनकी मानसिक स्थिति सही नहीं रहती। -सुदेश डोगरा, अध्यक्ष, जनकल्याण महिला समिति (महिलाओं पर काम करने वाला एक संगठन)

पीड़िताओं से बातचीत
मेरे साथ घरेलू हिंसा हुई। खूब मारा-पीटा गया। बाद में घर से निकाल दिया। ससुराल वाले बेटी को नहीं अपना रहे हैं। मेरे पति की मुझसे दूसरी शादी है। उन्होंने पहली पत्नी को भी इसलिए छोड़ दिया था, क्योंकि उनकी बेटी थी। उन्होंने मेरा बेटा मुझसे छीन लिया है, जबकि मुझे और मेरी बेटी को घर से निकाल दिया। -शिल्पा तिवारी, स्थानीय निवासी, दिल्ली

बच्चा न होने से ससुराल वाले मानसिक रूप से परेशान करते थे। पति भी रोज शराब के नशे में घर आता था। गाली-गलौज करता था। मुझे हर रोज मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। नशे में पति लड़ाई झगड़ा करता रहता है। जब मैं बहुत परेशान हो गई तब मैंने महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्था से मदद मांगी। अब पति व उसके परिवार से कोई मतलब नहीं है। अपना गुजरा खुद नौकरी से कर लेती हूं। -प्रिय वर्मा, स्थानीय निवासी, दिल्ली

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महानगरों में बढ़े महिलाओं के खिलाफ अपराध

  • 2021 में महिलाओं के प्रति अपराध के 4,28,278 मामले दर्ज हुए। 2020 में यह संख्या 3,71,503 थी। इस लिहाजा से एक साल में करीब 15.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
  • महिलाएं को सबसे ज्यादा पीड़ा अपनों ने पहुंचाई है। करीब 31.8 फीसदी मामलों में क्रूरता पतियों या संबंधियों ने की।
  • 20.8 फीसदी मामले दुष्कर्म के इरादे से महिलाओं पर हुए हमलों से जुड़े हैं।
  • इसके बाद करीब 17.6 फीसदी मामले महिलाओं का अपहरण और 7.4 फीसदी दुष्कर्म के हैं।
  • 49 वर्ष की आयु के बीच की 29.3 प्रतिशत महिलाओं को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा।
  • 18-49 वर्ष की आयु के बीच की 3.1 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा।
  • प्रति लाख महिला आबादी पर अपराध दर 2020 में 56.5 की तुलना में 2021 में 64.5 प्रतिशत थी।
  • 2021 में दस लाख से ऊपर की आबादी के महानगरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 43,414 मामले दर्ज हुए। 2020 में यह संख्या 35,331 थी। एक साल में बढ़ोतरी 22.9 फीसदी की हुई है।
  • महानगरों में सबसे ज्यादा अपराध दिल्ली में हुए। इसके बाद नंबर मुंबई का है। बेंग्लू तीसरे नंबर पर है।

दिल्ली में अपराध

  • पतियों व संबंधियों की क्रूरता के 4,674 मामले।
  • अपहरण के 3,948 मामले।
  • बच्चियों से दुष्कर्म के 833 मामले।
  • दहेज हत्या के 136 मामले। (स्रोत: एनसीआरबी-2021 की रिपोर्ट)

दिल्ली महिला आयोग की हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतें

  • जुलाई 2022 से जून 2023 के बीच 6,30,288 से ज्यादा कॉल।
  • दिल्ली में 92,000 और दूसरे राज्यों में 11,000 से ज्यादा मामले हुए दर्ज।
  • सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा के 38,342 मामले हुए दर्ज।
  • इसके बाद पड़ोसी से मारपीट के मामले।
  • दुष्कर्म और पॉक्सो में तीसरे और चौथे नंबर पर मामले दर्ज। (स्रोत: दिल्ली महिला आयोग)
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