हॉस्टल में उतरी थकान, कन्हैया ने कहा अपनी किताब खुद लिखूंगा
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के लाल दुर्ग में 23 दिनों से छायी खामोशी और मायूसी कन्हैया की घर वापसी के साथ गुलाल के रंगों के साथ हवा में बिखरी। छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के बीस दिनों के बाद कैंपस में लौटने पर ढपली, ढोल और लाल सलाम के साथ चेहरों पर हंसी तो ढाबों में रंगीन शाम गुलजार हो उठी।
लाल दुर्ग लाल सलाम के बीच ‘जेल के ताले टूटे, अपना भैया कन्हैया छूटा’ के नारों से गुलजार हो गया। गंगा ढाबा से लेकर ऐड ब्लॉक तक अपना कन्हैया जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे। जश्न रैली में हजारों की संख्या में छात्र शामिल हुए।
जेएनयू कैंपस की बुधवार शाम से ही सुरक्षा सख्त कर दी गयी थी। हालांकि जमानत बृहस्पतिवार को मिलने के चलते बुधवार को जश्न तो मना पर सादे ढंग से। कन्हैया की घर वापसी की तैयारियों में छात्र बुधवार रात जुटे रहे। हालांकि बृहस्पतिवार को कैंपस और ढाबे सुनसान थे, क्योंकि छात्र जश्न के विजयी जुलूस की तैयारियों में जुटे हुए थे।
तिहाड़ जेल में जमानत की कार्रवाई शुरू होने के साथ ही कैंपस का मुख्य गेट बंद कर दिया गया और पुलिस समेत सुरक्षा बल तैनात हो गए। शाम ढलते-ढलते सुनसान व गमगीन कैंपस अपने असली रंग में रंगा दिखा। छात्र पहले साबरमती ढाबे पर जश्न मनाते दिखे और फिर धीरे-धीरे जेएनयू की पहचान गंगा ढाबे में इकट्ठा होने शुरू हो गए।
हिरासत व न्याय प्रक्रिया की थकान हॉस्टल में उतरी
गंगा ढाबे से जश्न का विजयी जुलूस रात नौ बजे निकला। कन्हैया अपना कन्हैया, बंद कबूतर, पिंजरा तोड़, हल्ला बोल के नारों के साथ जुलूस शुरू हुआ। हाथों में भीमराव अंबेडकर की फोटो के साथ लाल झंडों समेत कई अन्य स्लोगन के साथ छात्र आगे बढ़ते दिखे। कन्हैया के देर रात तक इस विजय जुलूस में शामिल होने की सूचना थी।
सवा सात बजे कन्हैया पिछले गेट से कानूनी सलाहकारों व अपने गाइड प्रो. एस मालाकार व अन्य शिक्षकों के साथ हॉस्टल पहुंचे। कन्हैया के हॉस्टल पहुंचने की खबर कैंपस में फैल गयी।
हालांकि वे हॉस्टल पहुंचे और फिर अपने दोस्तों व छात्रों से मिले। इस दौरान वे बेहद कम बोल रहे थे। कानूनी सलाहकारों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश के तहत ही वे सधे हुए शब्दों के साथ अपने भाषण की तैयारी में जुट गए।
हॉस्टल पहुंचने के बाद मीडिया से बात करते हुए कन्हैया ने कहा, जेएनयू छात्रों, शिक्षकों और उन सभी का शुक्रिया जिन्होंने मुझ पर भरोसा दिखाया। सही को सही और गलत को गलत कहने की लड़ाई है और यह लड़ाई लंबी चलेगी।
यह लड़ाई देश को बचाने की लड़ाई है। मैं खुद अपनी कहानी पर किताब जरूर लिखूंगा। मैं अपने गांव, जिला व बिहार, देश समेत दुनिया को सच दिखाना चाहता हूं। मैं बिहार भी जाऊंगा। उन्होंने कहा कि मेरा मीडिया ट्रायल हुआ लेकिन मीडिया ने सच को सामने लाने का भी काम किया।