जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने पर कन्हैया ने लिखी भावुक पोस्ट
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जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने अपना कार्यकाल खत्म होने के मौके पर एक भावुक और लंबी पोस्ट लिखी है। कन्हैया ने फेसबुक पर लिखते हुए अपने कार्यकाल के कई अहम बिंदुओं का जिक्र किया है।
कन्हैया ने आंदोलन के संघर्षों को याद करते हुए जेएनयू नारेबाजी, रोहित वेमुला, एफटीआईआई और यूजीसी जैसे कई अहम मुद्दों पर अपने विचार प्रकट किए हैं।
कन्हैया ने मित्रों और कामरेड से संबोधित करते हुए यह पोस्ट लिखी। उन्होंने शुरुआत में लिखा कि उन लोगों को धन्यवाद कहना जिनको आप अपना मानते हो, थोड़ा विचित्र होता है। लेकिन फिर भी वे उन लोगों का आभार व्यक्त करना चाहते हैं, जो संभव परिस्थिति में संघर्ष में हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे।
'जेएनयू और जेएनयू छात्रसंघ की छवि धूमिल करने का प्रयास हुआ था'
कन्हैया ने आगे लिखा कि मैं छात्रों, शिक्षकों, कार्यकर्ताओं, जेएनयू के पूर्व छात्रों और कैंपस से बाहर के उन लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं जो समाज को पिछले जाने वाली ताकतों के खिलाफ समानता, न्याय और लोकतंत्र की लड़ाई में साथ रहे।
कन्हैया के मुताबिक स्डैंड विद जेएनयू आंदोलन इसलिए हुआ क्योंकि जेएनयू और जेएनयू छात्रसंघ की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन इस दौरान लोगों ने उनका जोरदार समर्थन किया।
कन्हैया के मुताबिक अगर दोबारा उन्हें मौका मिलता है तो वे विजयी मार्च की जगह जेएनयू में एकता मार्च निकालना चाहेंगे। क्योंकि वे और उनका संगठन हमेशा ही एकता के पक्ष में खड़े रहे हैं और अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें उन लोगों का भी समर्थन मिला जो कई मुद्दों पर उनकी राजनितिक विचारधारा से सहमत नहीं थे।
जानिए कैसे सुखियों में आए कन्हैया कुमार
पोस्ट में कन्हैया ने उनके कार्यकाल के दौरान हुए विवादों और आंदोलनों का ब्यौरा देते हुए उनके महत्तव को भी बताया। उन्होंने एफटीआईआई छात्रों का समर्थन, स्टैंडविदजेएनयू और रोहित वेमुला खुदकुशी विवाद के छात्रसंत्र की भूमिका को विशेष तौर पर स्पष्ट किया है।
बता दें कि कन्हैया कुमार के कार्यकाल के दौरान ही जेएनयू में 9 फरवरी को देशविरोधी नारेबाजी का मामला सामने आया था। जिसके बाद कन्हैया कुमार और जेएनयू सु्र्खियों में आ गए थे। कन्हैया को मामले में आरोपी बनाया गया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। नारेबाजी विवादअभी भी कोर्ट में हैं।
इतना ही नहीं इस मामले पर राष्ट्रीय राजनीति में भी जमकर हंगामा हुआ था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी खुद छात्रों का समर्थन करने जेएनयू पहुंचे थे।